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हरिद्वार: कार्तिक पूर्णिमा के बाद पसर जाएगा सन्नाटा

 
har ki padi
अब मकर संक्रांति पर धर्मनगरी में नजर आएंगे श्रद्धालु
कुमार दुष्यन्त
हरिद्वार (दैनिक हाक):
कार्तिक पूर्णिमा के बाद  धर्मनगरी में सन्नाटा पसर जाएगा।कार्तिक पूर्णिमा हरिद्वार के पर्व कैलेंडर का अंतिम स्नान पर्व होता है।अब दो माह बाद मकर संक्रांति पर ही धर्मनगरी में श्रद्धालु जुटेंगे।
हरिद्वार धार्मिक पर्यटक स्थल है। वर्षभर यहां श्रद्धालु-पर्यटक देशविदेश से धार्मिक आयोजन, कर्मकांड व पर्यटन के लिए पहुंचते रहते हैं। आमतौर पर औसतन आठ से दस हजार यात्री प्रतिदिन विभिन्न माध्यमों से हरिद्वार पहुंचते हैं। लेकिन कार्तिक पूर्णिमा से मकर संक्रांति के बीच यह औसत भी काफी नीचे गिर जाता है।कारोबारी इस अवधि को सर्दियों की मंदी के नाम से पुकारते हैं। हरिद्वार में यात्रियों की आवाजाही की शुरुआत जनवरी में मकर संक्रांति से होती है।इसके बाद बसंत पंचमी, शिवरात्रि, बुध पूर्णिमा, गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी, श्रावण का मेला और मासिक पर्वों के साथ कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व पर इसकी सम्पन्नता होती है। कार्तिक पूर्णिमा के बाद दो माह हरिद्वार में पूरा सन्नाटा रहता है। इस दौरान हरिद्वार के निवासी व दुकानदार भी पिकनिक व सैरसपाटों में व्यस्त हो जाते हैं।हालांकि 25 दिसंबर के आसपास बड़े दिन की छुट्टियों में भी कुछ दिन धर्मनगरी में चहलपहल रहती है। लेकिन हरिद्वार के वार्षिक स्नान कैलेंडर से इसका कोई संबंध नहीं होता।
अब लगभग वर्ष भर रहता है श्र(ालुओं का आगमन
साधन व लोगों की क्रय क्षमता में सुधार के बाद अब हरिद्वार में पहले जैसा मंदा नहीं होता। एक समय यहां केवल तीन माह ही बाजार खुला करते थे। सावन के बाद से ही धर्मनगरी के बाजार ठप्प हो जाते थे। ऐसे में वर्षभर कमाई के लिए यहां के दुकानदार अन्य राज्यों में लगने वाले मेलों में अपना माल बेचने के लिए निकल जाया करते थे।
1980 के बाद लोगों के जीवन में आए आर्थिक बदलाव व सुख साधन बढ़ने के बाद धर्मनगरी में श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आगमन में इजाफा होने से अब लगभग वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होने लगा है।