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त्योहारी सीजन में केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान

त्योहारी सीजन में केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान

शर्तों के साथ राज्यों को 50 साल के लिए मिलेगा कर्ज

-केंद्रीय कर्मचारियों को 10 हजार एडवांस देगी सरकार

नई दिल्ली: त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ाने के लिए सोमवार को कई महत्वपूर्ण ऐलान किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को 12 हजार करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त लोन देगी। इस लोन की वापसी 50 साल में की जा सकेगी।

सरकार कैश वाउचर्स और फेस्टिवल एडवांस स्कीम लेकर आई है। इसके तहत केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए अपने सभी कर्मचारियों को 10 हजार रुपए एडवांस में देगी। यह रुपए फेस्टिवल एडवांस के तौर पर दिए जाएंगे। सरकार के इस कदम से करीब 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों को त्योहार पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त पैसा उपलब्ध होगा।

सरकार 12 प्रतिशत या इससे ज्यादा जीएसटी वाले सामान खरीदने के लिए सरकार अपने कर्मचारियों को एलटीसी टिकट फेयर के बदले कैश देगी। इस पर केंद्र सरकार 5675 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके अलावा इस मद में 1900 करोड़ रुपए पीएसयू और बैंक खर्च करेंगे। वित्त मंत्री का कहना है कि इससे अर्थव्यवस्था में 19 हजार करोड़ रुपए आएंगे। यदि राज्य भी इसी दिशा में कदम उठाते हैं तो बाजार में 9 हजार करोड़ रुपए और अतिरिक्त आएंगे। उन्होंने कहा कि अगर निजी क्षेत्र ने भी अपने कर्मचारियों को राहत दी तो इकोनॉमी में कुल मांग 1 लाख करोड़ रुपए के पार हो सकती है। केंद्रीय कर्मचारियों को एलटीसी के बदले दिए जाने वाले वाउचर 31 मार्च 2021 तक खर्च करने होंगे। एलटीसी के बदले दिए जाने वाले वाउचर्स से कर्मचारियों को डिजिटल खरीदारी करनी होगी। केंद्र सरकार सड़क, डिफेंस इंफ्रा, वाटर सप्लाई और शहरी विकास के लिए 25 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त देगी। बजट में इन सेक्टर्स के लिए 4.31 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था।

-10 किस्तों में वापस कर सकेंगे फेस्टिवल एडवांस

छठे फाइनेंस कमीशन तक फेस्टिव एडवांस की व्यवस्था थी। इसमें तहत कर्मचारियों को 4,500 रुपए दिए जाते थे। यह नॉन-गैजेटेड के लिए था। सातवें कमीशन में इसकी व्यवस्था नहीं थी लेकिन अब इसे एक बार के लिए रिवाइव किया जा रहा है। अब यह सभी के ऊपर लागू होगी। इसके तहत केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों को 10,000 रुपए दिए जाएंगे। इसे कर्मचारी 10 किस्तों में वापस कर सकते हैं। 31 मार्च 2021 तक इसे खर्च करना होगा। यह 10,000 रुपए के प्रीपेड रूपे कार्ड के रूप में दिया जाएगा। यह इंटरेस्ट फ्री होगा। इसे कहीं भी खर्च किया जा सकता है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर इस योजना के तहत 4,500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यदि राज्य सरकार भी इस योजना को लागू करेगी, तो 8,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

-राज्यों की बाजार उधारी 3.75 लाख करोड़ पहुंची

इस वित्त वर्ष में अब तक राज्यों की बाजार से उठाई गई उधारी 55 प्रतिशत बढ़कर 3.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह राशि उनके इस वर्ष के बजट में तय की गई सालाना राशि का 75 प्रतिशत तक है। इनमें से 17 राज्यों ने राज्य विकास ऋण की नवीनतम नीलामी में 22,350 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि जुटाई है। इस वित्त वर्ष की शुरुआत से ही कोविड-19 महामारी के कारण राज्यों के राजस्व पर बुरा असर पड़ा है। दूसरी तरफ केन्द्र सरकार भी उन्हें उनकी माल एवं सेवाकर (जीएसटी) बकाये का भुगतान नहीं कर पा रही है। इससे राज्य रिण जाल में उलझते जा रहे हैं। नवीनतम रिण प्राप्ति अधिसूचित राशि के मुकाबले 1,200 करोड़ रुपये अधिक रही है। महाराष्ट्र और झारखंड ने इस दौरान क्रमश: 1,000 करोड़ रुपये और 200 करोड़ रुपये अधिक राशि उठाई है।

केयर रेटिंग्स के ताजा विश्लेषण के मुताबिक इस वित्त वर्ष में अब तक (सात अप्रैल से लेकर छह अक्ट्रबर 2020) 28 राज्यों और दो संघ शासित प्रदेशों ने बाजार से कुल मिलाकर 3.75 लाख करोड़ रुपये का उधार लिया है। यह राशि एक साल पहले इसी अवधि में इन राज्यों द्वारा उधार ली गई 2.43 लाख करोड़ रुपये से 55 प्रतिशत अधिक है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाही के उधारी चार्ट के मुताबिक इस दौरान राज्य बाजार से 5.07 लाख करोड़ रुपये जुटा सकते हैं। इसमें से राज्य करीब 75 प्रतिशत राशि पहले ही उठा चुके हैं। पहली तिमाही में तय उधारी कार्यक्रम के मुकाबले राज्यों ने 16 प्रतिशत अधिक (48,115 करोड़ रुपये) का उधार बाजार से लिया है।

चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से ही राज्यों की वित्तीय स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। कोविड-19 के प्रसार पर काबू रखने के लिये मार्च अंत से लागू लॉकडाउन के चलते जहां एक तरफ राज्यों की राजस्व प्राप्ति काफी कम रही है वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य सुविधाओं पर खर्च तेजी से बढ़ा है। इससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान सबसे ज्यादा उधार लेने वाले राज्य हैं। राज्यों के कुल उधार में इन राज्यों का हिस्सा 52 प्रतिशत तक है। अरुणाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मणपुर, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों की उधारी 21 से लेकर 343 प्रतिशत तक बढ़ी है।



Updated : 13 Oct 2020 12:13 AM GMT
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