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फक्कड़ साधुओं एवं भिखारियों की बढ़ती संख्या बनी मुसीबत का सबब

 Agencies |  2017-06-15 07:59:50.0  0  Comments

फक्कड़ साधुओं एवं भिखारियों की बढ़ती संख्या बनी मुसीबत का सबब

हरिद्वारः फक्कड़ साधुओं एवं भिखारियों की बढ़ती संख्या से हरिद्वार नागरिकों एवं बाहर से आने वाले यात्री श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फक्कड़ साधु एवं भिखारी रात्रि होते ही शराब के नशे में लड़ते झगड़ते हैं जिसके चलते स्थानीय लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हरिद्वार गंगा घाटों के अलावा पंतद्वीप पार्किंग क्षेत्र, लालजीवाला, सूखी नदी, बैरागी कैम्प आदि क्षेत्रों में फक्कड़ साधुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिन कारणों से आये दिन अपराधों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
स्थानीय निवासी नरेन्द्र श्रमिक का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत भिक्षु गृह की संख्या एवं भिखारियों की संख्या विभाग द्वारा मांगी गई थी जबकि विभाग द्वारा भिखारियों की संख्या हरिद्वार में हजारों बताई गई है लेकिन भिक्षु गृह में मात्र दो भवन होने की सूचना विभाग द्वारा दी गई है जो कि भिखारियों के लिए नाकाफी है। हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों में भिखारियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है साथ ही फक्कड़ साधु आये दिन यात्रियों के साथ बदसलूकी करते हैं। कई बार तो मारपिटाई पर उतारू हो जाते हैं। उन्होंने मांग की कि विभिन्न मलीन बस्तियों काॅलोनी, झुग्गी झोपडियों के अलावा हरिद्वार के विभिन्न गंगा घाटों पर असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। पुलिस प्रशासन सत्यापन अभियान नहीं चला रही है। जिन कारणों से असमाजिक तत्वों के साथ-साथ भिखारियों एवं फक्कड़ साधुओं की बढ़ती संख्या के कारण आये दिन अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। रात्रि में शराब व नशा करके फक्कड़ साधु व भिखारी आपस में लड़ते झगड़ते हैं। महिलाओं बच्चों का घरों से निकलना भी दुर्भर हो गया है। देश विदेश से आने वाले यात्री श्रद्धालुओं के साथ भी भिखारी बदसलूकी करते हैं। सुबह के समय घूमने के लिए महिलायें बच्चे वृद्धजन निकलते हैं ऐसे मंे उनकी जान पर भी खतरा बना रहता है। क्योंकि कई बार अपराधिक छवि के लोग भी वेशभूषा बदलकर हरिद्वार नगरी मंे निवास कर रहे हैं जो कि कई बार बड़े अपराधों को भी करने से पीछे नहीं हटते हैं। नरेन्द्र श्रमिक ने मांग की कि बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान चलाया जाये साथ ही भिखारियों की बढ़ती संख्या पर भी शासन प्रशासन को लगाम लगाने की आवश्यकता है। विभिन्न गंगा घाटों पर बढ़ती भिखारियों की संख्या लोगांे के लिए दुखदाई बना हुआ है।
--हाक न्यूजलाईन

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