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सैंकड़ों गंदे नाले गंगा में हो रहे हैं समाहित

सैंकड़ों गंदे नाले गंगा में हो रहे हैं समाहित

हरिद्वारः हरिद्वार धर्मनगरी के गंगा तटों पर व्यापक रूप से गंदगी के चलते गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का नारा साफ तौर पर झूठा साबित हो रहा है। सैकड़ों गंदे नाले गंगा में समाहित हो रहे हैं। ज्वालापुर से लेकर उत्तरी हरिद्वार तक सैकड़ों नाले गंगा में बेरोकटोक डाले जा रहे हैं एनजीटी के आदेशों का पालन भी नहीं हो पा रहा है। होटल धर्मशालाओं, आश्रमों के अलावा गंगा तटों सटी कॉलोनियों का गंगा पानी गंगा में बहाया जा रहा है। शासन प्रशासन इस ओर उचित कदम नहीं उठा पा रहा है। जिसके चलते गंगा को प्रदूषण मुक्त करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार गंगा स्वच्छता को लेकर कई योजनायें चला रही है लेकिन धरातल पर कार्यवाही होते हुए नजर नहीं आ रही है। सीवर का गंदे पानी के साथ-साथ होटलों ढाबों से निकलने वाला गंदा पानी भी गंगा में छोड़ा जा रहा है। छोटे बड़े होटल हजारों की तदाद में गंगा तटों पर निर्माणाधीन हैं। नये होटल भी गंगा तटों पर बनाये जा रहे हैं। 200 मीटर के दायरे में सैकड़ों होटल बने हुए हैं जो कि अवशिष्ट पदार्थो को सीधे तौर पर गंगा में समाहित कर रहे हैं। राज्य सरकार दावे तो करती हैं लेकिन ठोस उपाय नहीं होने के कारण गंगा को प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। औद्योगिक क्षेत्रों का विषैला कैमिकल, कूड़ा कचरा पॉलिथीन भारी मात्रा में गंगा में बेरोकटोक फेंका जा रहा है। बड़े पैमाने पर प्लास्टि सामग्री का प्रयोग धर्मनगरी में बढ़ने से सीधे तौर पर प्लास्टिक को गंगा में ही फंेका जाता है। बड़े पैमाने पर कूड़े कचरे के रूप में प्लास्टिक शहर भर में हो रही हैं जिसके चलते गंगा को स्वच्छ करने की मुहिम को पलीता लगाया जा रहा है। सम्बन्धित विभाग के अधिकारी अपने दायित्वों के प्रति खरे नहीं उतर रहे हैं जिसके चलते हजारों नाले गंगा में समाहित किये जा रहे हैं। विभाग आंख मूंदे सो रहे है। रसूकदार लोगांे पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होती है जबकि बार-बार एनजीटी नियम बनाती है लेकिन नियमों का पालन सम्बन्धित विभाग नहीं कर पा रहे है।
--हाक न्यूजलाईन

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