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अरुणाचल प्रदेश में चीन का बढ़ता प्रभाव

अरुणाचल प्रदेश में चीन का बढ़ता प्रभाव

ईटानगर: हाल ही में लोकसभा में चर्चा के दौरान पूर्वी अरुणाचल प्रदेश से सांसद तपिर गाओ द्वारा राज्य के पूर्वी क्षेत्रों में चीनी सेना के बढ़ते घुसपैठ की जानकारी दी गई | यह क्षेत्र चगलगम से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर है | निश्चित तौर चीनी अतिक्रमण भारत के लिए चिंता का विषय है | मौजूदा सांसद ने यहां तक कहा कि यदि कहीं आगे डोकलाम होगा तो वह अरुणाचल प्रदेश है | माननीय सांसद द्वारा लोकसभा में दिया गया यह बयान दर्शाता है कि वह अपने क्षेत्र में बढ़ते चीनी घुसपैठ से चिंतित हैं | भारत चीन का सीमा विवाद किसी से छिपा नहीं है लेकिन मीडिया में भी चीनी घुसपैठ को तवज्जो नहीं दी जाती है | आज का मीडिया उन्हीं खबरों को दिखाता है जिससे उनकी टीआरपी बढ़ सके | अभी हाल ही में भारत के रक्षामंत्री एक पुल के उद्घाटन के लिए अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर गए थे | जिसके तुरंत बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी | ऐसा पहली बार नहीं है | मौजूदा समय में चीन के विरोध दर्ज कराने का तरीका बदल गया है | पहले जहां चीन द्वारा समाचार पत्रों में लेख के माध्यम से भारतीय शीर्ष नेतृत्वकर्ताओं की अरुणाचल प्रदेश यात्रा का विरोध किया जाता था | वही आज चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं द्वारा आधिकारिक रूप से विरोध दर्ज कराया जाता है |

नेपाल में भी चीन लगातार अतिक्रमण कर रहा है लेकिन वहां पर भी स्थानीय मीडिया और भारतीय मीडिया ने भी कभी इस को उजागर नहीं किया | भारत सरकार का इस मुद्दे पर गंभीरता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि लोकसभा और राज्यसभा में भी चीन के अतिक्रमण के मुद्दे पर चर्चा नहीं की जाती | अब हमें इस परिपाटी को बदलने की आवश्यकता है | वर्तमान समय में अरुणाचल प्रदेश के लगभग 60 से 70 किलोमीटर के क्षेत्र पर चीन ने अतिक्रमण कर रखा है | यह क्षेत्र विश्व के तीन से चार सबसे छोटे देशों के कुल क्षेत्रफल से भी ज्यादा है | चीन द्वारा चगलगाम क्षेत्र के निकट एक ब्रिज का निर्माण किया गया है | जिसके माध्यम से चीनी सेना आसानी से भारतीय भूभाग में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है | विगत वर्षों में जहां चीनी सेना का भारतीय भूभाग में घुसपैठ कुछ दिनों तक ही सीमित रहता था | आज इन्हीं क्षेत्रों में चीनी सेना ने स्थाई चौकियों का निर्माण कर लिया है और अब वे इस विशाल क्षेत्र पर नियमित पेट्रोलिंग भी कर रहे हैं |

भारत सरकार द्वारा भी अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद की गंभीरता को देखते हुए 2000 किलोमीटर का एक हाईवे भी इस क्षेत्र में बनाया जा रहा है | जिससे भारतीय सेनाओं की भी पहुंच आसानी से इन दुर्गम क्षेत्रों में हो सके | चगलगाम वहीं क्षेत्र है जहां पर वर्ष 2013 में चीनी सैनिकों ने लगभग 30 दिनों तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी | अरुणाचल प्रदेश का यह विवाद चीन द्वारा मैकमोहन रेखा को ना मानने के कारण है | जिसको अंग्रेजों द्वारा एक वार्ता के बाद निर्धारित किया गया था | जिसमें चीन की राष्ट्रवादी सरकार, तिब्बत सरकार और ब्रिटिश भारत शामिल हुआ था | चीन की सरकार अरुणाचल प्रदेश के विवाद को भारत पर दबाव बनाए रखने के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रही है | जिसमें अभी तक उसको सफलता भी मिली है और इस पैकेज डील से चीन के मित्र पाकिस्तान को भी मदद मिलती है |

अरुणाचल प्रदेश के निवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं | इस प्रदेश का विकास ना होने का कारण सीमा विवाद ही है | जिसके कारण विदेशी निवेश अरुणाचल प्रदेश में नहीं आ पाता है | यहां तक कि भारतीय निवेशक भी अरुणाचल प्रदेश में निवेश करने से बचते हैं | चीन ने किस प्रकार से वैश्विक निवेशकों के साथ-साथ वैश्विक संस्थाओं पर दबाव बनाकर रखा है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि भारत सरकार ने कई बार विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक से अरुणाचल प्रदेश में विकास योजनाओं के लिए ऋण की मांग की लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली | अरुणाचल प्रदेश आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है इसके लिए भारत सरकार भी जिम्मेदार है | वर्ष 2014-15 में जापान ने स्वयं अरुणाचल प्रदेश के विकास के लिए ऋण देने की बात की | लेकिन चीन को खुश रखने के लिए भारत सरकार ने इसको नकार दिया | आज समय की मांग है कि भारत सरकार को ऐसे देशों से संपर्क बेहतर बनाने की आवश्यकता है, जो चीन की आक्रमणकारी नीतियों और अतिक्रमण से परेशान हैं | इसमें यदि प्रभावशाली देशों की बात की जाए तो अमेरिका और जापान आते हैं |

भारत सरकार का प्रयास यह होना चाहिए कि द्विपक्षीय बैठकों के माध्यम से जापान और अमेरिका के निवेशकों को अरुणाचल प्रदेश के विकास कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाए | इसके अतिरिक्त भारत सरकार को अपनी ज्यादातर द्विपक्षीय बैठकों को अरुणाचल प्रदेश में कराने की आवश्यकता है | अरुणाचल प्रदेश में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करना भी एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है | मौजूदा समय में भारत सरकार को अरुणाचल प्रदेश के परिपेक्ष्य में साहसिक फैसले लेने की आवश्यकता है और चीन के रुख से ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है | मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी चीन के अनुकूल नहीं है इसलिए यदि ऐसे समय में अरुणाचल प्रदेश के लिए कुछ साहसिक फैसले लिए जाते हैं तो निश्चित रूप से इसमें सफलता मिलेगी |

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