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उत्तर प्रदेश: योगी का राज-काज

 Agencies |  2017-05-04 06:53:41.0  0  Comments

उत्तर प्रदेश: योगी का राज-काज

उत्तर प्रदेश जहां देश के महत्वपूर्ण राज्यों में देश का सबसे बड़ा राज्य गिना जाता है वहीं इस राज्य के मुख्यमंत्री पद को भी अब तक ऐसे कई महान नेताओं ने सुशोभित किया है जो राष्ट्रीय राजनीति के क़द्दावर नेताओं में गिने जाते थे। उदाहरण के तौर पर पंडित गोविंद वल्लभ पंत,संपूर्णानंद,सी बी गुप्ता, सुचेता कृपलानी,चौधरी चरणसिंह, कमलापति त्रिपाठी,हेमवती नंदन बहुगुणा,नारायण दत्त तिवारी तथा विश्वनाथ प्रताप सिंह जैसे राष्ट्रीय नेता उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री पद को सुशोभित कर चुके हैं। और अब इसी राज्य के निर्वाचित बहुसंख्य विधायकों ने एक साधू वेश धारी एवं गुरु गौरक्षनाथ पीठ के गद्दीनशीन योगी आदित्यनाथ को अपना मुख्यमंत्री चुनकर देश में पहली बार किसी साधूवेशधारी नेता को उत्तर प्रदेश का शासन चलाने का जि़म्मा सौंपा है। योगी आदित्यनाथ की शख्सयत भारतीय राजनीति में कोई नई नहीं है। वे 1998 से लेकर अब तक पांच बार गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हो चुके हैं। उन्हें संसदीय राजनीति का पूरा अनुभव है, उन्होंने गोरखपुर के विकास के लिए पहले भी काफी काम किए हैं। ले-देकर उनके विरुद्ध दो ही बातें उनके विरोधियों द्वारा प्रचारित की जाती रही हैं। एक तो यह कि वे $फायर ब्रांड हिंदुत्ववादी नेता हैं और उनके भाषणों से सांप्रदायिक दुर्भावना फैलती है और वे मुस्लिम विरोधी भावनाएं भड़काने में का$फी दक्ष हैं। उनके विरुद्ध इस प्रकार के कई मु$कद्दमे भी चल रहे हैं। दूसरी बात यह कि योगी आदित्यनाथ हिंदू महासभा की विरासत को आगे बढ़ाने वाले नेता हैं। महंत दिगिवजय नाथ तथा महंत अवैद्यनाथ की उस विरासत के प्रतिनिधि हैं जिन्होंने विवादित अयोध्या राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत की थी। ज़ाहिर है योगी आदित्यनाथ भी मंदिर आंदोलन से प्रखर रूप से जुड़े रहे तथा मंदिर निर्माण के ज़बरदस्त पक्षधर हैं।
ऐसे व्यक्ति के उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बैठने के बाद इस तरह के $कयास लगाए जाने स्वाभाविक हैं कि वर्तमान मुख्यमंत्री आ$िखर राज्य के प्रशासनिक ढांचे को कैसे नियंत्रित कर सकेंगे,जिस राज्य में राष्ट्रीय राजनीति के कई कद्दावर नेता मुख्यमंत्री रह चुके हों वहां योगी आदित्यनाथ अपने-आप को कैसे स्थापित कर सकेंगे, विभिन्न धर्मों,जातियों व समुदायों के इस विशाल मिश्रित राज्य को चलाने के लिए मुख्यमंत्री ऐसे कौन से फैसले लें जिससे पूरे राज्य की जनता लाभन्वित हो तथा जिसका प्रभाव पूरे राज्य के विकास पर पड़े। हालांकि इस संदर्भ में यहां यह कहना भी ज़रूरी है कि उत्तरप्रदेश के साथ-साथ पंजाब,उत्तराखंड,गोआ तथा मणिपुर जैसे अन्य चार राज्यों में भी विधानसभा चुनाव हुए थे। उन राज्यों के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री भी तरह-तरह के लोकहितकारी फैसले ले रहे हैं। परंतु योगी आदित्यनाथ के साधूशाही व्यक्तित्व के चलते तथा उनके विवादित राजनैतिक व्यक्तित्व की वजह से मीडिया की नज़रें उनके रोज़ाना के काम-काज व फैसलों पर टिकी हुई हैं। काफी हद तक वर्तमान समय में अधिकांश मीडिया घराने का सत्ता की ओर झुकाव भी इसका प्रमुख कारण है। मिसाल के तौर पर जनप्रतिधियों को अपनी कार में लाल बत्ती का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, यह घोषणा सबसे पहले 2015 में दिगी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई थी। केजरीवाल ने अपने मंत्रियों व निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपनी-अपनी कारों से लाल बत्ती हटाकर राजनीति से वीआईपी कल्चर को बिदा करने का आह्वान किया था। इसके पश्चात ताज़ा-तरीन विधानसभा चुनावों के बाद सबसे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने पंजाब में वीआईपी कल्चर को समाप्त करते हुए प्रदेश की समस्त वीआईपी कारों से लाल बत्ती हटाए जाने की घोषणा कर दी। परंतु इस समाचार को टेलीविज़न में प्रमुख स्थान तब मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी वीआईपी गाडिय़ों से लाल बत्ती हटाने की घोषणा की गई और उससे भी बड़ा कवरेज इस समाचार को तब दिया जाने लगा जब उत्तरप्रदेश की सत्ता से जुड़े अनेक वीआईपी मीडिया को बुला-बुला कर उसके सामने अपने हाथों से अपनी कारों पर चिपकी हुई लाल बत्ती हटाते नज़र आए।
बहरहाल, जहां मीडिया इस समय मोदी-योगी के अलाप में कुछ ज़्यादा ही बढ़ा-चढ़ा कर इनके शासनकाल की उपलिब्धयों को पेश कर रहा है वहीं वास्तव में योगी आदित्यनाथ ने ऐसे कई $फैसले भी लिए हैं जो प्रदेश की जनता के लिए हितकारी साबित हो सकते हैं। वहीं कई फैसले ऐसे भी हैं जो उनके निजी पूर्वाग्रह तथा उनके सांस्कृतिक संस्कार संबंधी पूर्वाग्रह को दर्शाते हैं। भले ही वे $फैसले जनता के लिए नुकसानदेह अथवा असहज ही क्यों न हों। मिसाल के तौर पर अवैध बूचडख़ाने बंद करने के नाम पर सत्ता में आते ही योगी द्वारा चलाया गया अभियान कोई इतना ज़रूरी या लोकहितकारी अभियान नहीं था। ऐसा करने से उन्होंने इस व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों को बेरोज़गार कर दिया है। इसी प्रकार उन्होंने शिक्षकों व सरकारी अधिकारी के आ$िफस के कार्यकाल में जींस व टीशर्ट पहनने पर रोक लगा दी है। उन्होंने अपने मंत्रियों की संपत्ति का ब्यौरा तलब किया है। हालांकि मंत्रीगण चुनाव लडऩे से पूर्व ही चुनाव आयोग के समक्ष अपना चरित्र व संपत्ति का घोषणापत्र जमा करते हैं। इसी प्रकार उनके कई $फैसले ऐसे हैं जो उनकी हिंदूवादी राजनीति का दर्पण हैं। जैसे उन्होंने अयोध्या में रामायण संग्रहालय के लिए 25 एकड़ ज़मीन देने की घोषणा की है। अयोध्या के विकास के लिए भी उन्होंने कई योजनाएं घोषित की हैं।
परंतु योगी आदित्यनाथ ने कई घोषणाएं ऐसी भी की हैं जो वास्तव में प्रदेश तथा देश के विकास के लिए तो ज़रूरी थीं ही साथ-साथ इन घोषणाओं से पारंपरिक लचर शासन व्यवस्था पर भी एक करारा प्रहार हुआ है। मिसाल के तौर पर प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में स$फाई का विशेष अभियान चलाना,यहां पान-गुटखा खाना प्रतिबंधित करना,किसानों का शत-प्रतिशत गेहूं सरकार द्वारा $खरीदने की घोषणा करना,निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से बढ़ाई जाने वाली $फीस पर लगाम लगाना तथा अपना कोचिंग सेंटर चलाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश देना, राज्य में परीक्षा के दौरान न$कल रोकने हेतु विशेष अभियान चलाना,जेनेरिक दवाईयों की तीन हज़ार दुकानें खोलने का आदेश देना तथा सरकारी अ$फसरों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्यौरा मुख्य सचिव को देना जैसी और भी कई बातें हैं जो यदि अमल में लाई जा सकती है तो निश्चित रूप से इससे राज्य का काफी कल्याण हो सकेगा तथा विकास होने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लग सकेगा। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण निर्णय योगी सरकार द्वारा यह लिया गया कि राज्य में कई महापुरुषों की जयंती के नाम पर होने वाली तथा कुछ त्यौहार सरीखी छुट्टियों को रद्द कर दिया गया। इसमें सभी धर्मों के ऐसे त्यौहार व महापुरुषों से जुड़ी छुट्टियां शामिल हैं जिनपर कार्यालयों,,स्कूलों तथा महाविद्यालयों में छुट्टी किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। सिवाए इसके यह छुट्टियां उस महापुरुष से संबंधित वर्ग,धर्म अथवा समुदाय के लोगों को खुश करने के उद्देश्य से घोषित की गई थीं। इन छुट्टियों को समाप्त करने के साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया यह निर्देश भी अत्यंत सराहनीय है कि महापुरुषों की जयंती पर होने वाली छुट्टियों के बजाए उस दिन इन्हीं महापुरुषों के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक बातों की जानकारी स्कूल,कॉलेज तथा कार्यालयों में दी जानी चाहिए जिससे कि लोगों को उन महापुरुषों के विषय में विस्तार से पता चल सके। आशा की जानी चाहिए कि योगी राज उत्तरप्रदेश में बिना किसी दुर्भावना व भेदभाव के एक सुशासन का परिचय देने वाला शासनकाल साबित होगा।
--निर्मल रानी

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