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राधा के गांव रावल में प्रीत से सराबोर

 Agencies |  2017-03-09 07:26:09.0  0  Comments

राधा के गांव रावल में प्रीत से सराबोर

  • लाठियों से निकलीं रंग-रस की फुहारें
  • श्रीहरिदास भक्त रसिकों के कंठ से प्रवाहित हुई भक्तिरस की सरिता
  • हुरियारिनों ने हुरियारों संग भक्तों को लठ मार-मार किया निहाल
  • राधा कृष्ण ने दरवाजे पर आकर खेली और खिलाई होली

मथुराः कन्हैया की आल्हादिनी शक्ति वृषभान दुलारी कीर्ति किशोरी राधा रानी की जन्मभूमि में प्रीत से सराबोर लाठियों से निकली रंग.रस की फुहारें भक्तों को आनंदविभोर कर गईं। हुरियारिनों ने हुरियारों के साथ दर्शकों पर भी लट्ठ मार.मारकर खूब प्यार उड़ेला। उत्सव को ऊंचाइयां देने में प्रिया प्रियतम भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने दरबाजे पर आकर होली खेली। प्रिया का आंगन बांके विहारी को प्रकट करने वाले हरिदास जी की जय.जयकार और संगीत सरिता से भी तर.बतर हुआ।
योगेश्वर से उम्र में बड़ी राधा रानी का जन्म रावल ग्राम के सरोवर में हुआ था। कालांतर में इस ग्राम में रसखान ने युगल का साक्षात्कार किया। इसके बाद रसखान जी ने लिखा कि करील की कुंजन ऊपर बारौ। इसी राधा ग्राम में मंगलवार को लठामार होली उत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर सेवायत मुखिया ललित मोहन कल्लाए जगमोहन कल्लाए रमा देवी ने राहुल कल्ला के सहयोग से प्रातः युगल विग्रह का अभिषेक-श्रृंगार किया। युवाओं की टोली ने इस बीच मंदिर के बाहर गुलाल-रंग की होली शुरू कर दी। इसके बाद राजभोग अर्पित किए। मंदिर, जगमोहन, प्रांगण तथा मुख्य गेट रंग-बिरंगे सुगंधित पुष्पों से सजाया.संवारा। मंदिर में प्रसाद का दौर शुरू हो गया।
बहुरंगी हुईं फिजाएंः शाम 3 बजे राधा कृष्ण सज-धजकर मंदिर के मुख्य गेट पर आ पहुंचे। फिर क्या था गुलाल-अबीर की बरसात होने लगी। महिला-पुरुष और ग्वाल-बाल नृत्य करने लगे। गुलाल के बादल बनने और बिगड़ने लगे। फिजाओं में लाल, गुलाबी, हरा, केसरिया, पीला आदि रंग खुल गया। गुलाल, रंग, पुष्पों संग चंदन की खुशबू मन मोहने लगी।
हुरियारिनों ने चटकाए ग्वाल-बालः 4 बजे ही थे कि रावल की हुरियारिनों का आना शुरू हो गया। उन्हें पहचानकर ग्राम के छोटे.छोटे बच्चों ने अपने रिश्तों को परवान चढ़ाते हुए उन पर गुलाल.रंग बरसाना शुरू कर दिया। हुरियारिनें में रंग में आगईं और उन्होंने सबसे पहले बच्चों को प्रीत से लठियाकर तितर बितर किया। इसके बाद हुरियारिनों ने राधा कृष्ण के समक्ष नृत्य करते हुए रसिया गाकर दर्शकों को आनंद बढ़ाया। हुरियारिनों ने इसके बाद दर्शकों को भी लठियाना शुरू कर दिया। जो भक्त दो पहिया वाहनों पर चल रहे थे उन्हें भी मार लगाई।
खाकी भी हुई रंगीनः रसिया और हुरियारिनों ने खाकी पहने पुरुषों और महिलाओं को भी लाठियों से प्यार किया। रसिकों ने खाकी को रंगा।
पागल ने रिझाए भक्त और भगवानः सायं वेला में रसिकों ने शास्त्रीय संगीत की सरिता प्रवाहित करते हुए भजन गायन करना शुरू किया। इसका आनंद लुटते हुए आधा घंटे ही हुआ था कि हरिदास भक्त रसिका पागल दल.बल सहित आ पहुंचे। पागल ने युगल के समक्ष नत मस्तक होने के बाद अपने फन का जबरदस्त प्रदर्शन कर भगवान संग भक्तों को भी रिझाया। पागल, रुद्रगिरि महाराज, विष्णु बावरा, चंद्रकला अमृतसर, कुंज विहारी, पियूष कैलाश अमित आदि संगीत के मजे फनकारों के गायन.वादन के बीच हुरियारों-हुरियारिनों और भक्तों ने भी जमकर नृत्य किया।
पांच क्विंटल उड़ा गुलालः मंदिर प्रबंधन ने होलिकोत्सव के लिए दस मन गुलाल का प्रबंध किया। भक्त समुदाय अपने साथ मनो गुलाल लेकर पहुंचा। इस दौरान परिसर और मंदिर के बाहर जमीन.फर्श गुलाल से खूब अटी।
सैंकड़ों वाहनों की लगी लाइन, हजारों ने की मस्तीः पौराणिक भूमि में मंगलवार को मंगलमय बनाने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। सैकड़ों चारए तीनए दो पहिया वाहनों की भीड़ लगी। भीड़ में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखण्ड आदि प्रांतों के भक्त शामिल थे। सेवकों बलवीर पंडित, शेखर, आशुए देवेंद्र, प्रेम पंडित, बंगाली, जगदीश, महेंद्र, कालू, चौबे, भीम, गिरधारी, रमन आदि ने सेवा का परचम लहराया।
इच्छा है कि अंतिम स्वास रावल में लूंः गुजराती बाबाः रावल के महत्व का स्वीकारते हुए सिने तारिका एवं सांसद हेमा मालिनी ने गांव को गोद लिया है। इसी में आए नवीन कृष्ण दास गुजराती बाबा ख् 63,ने बताया कि उनकी इच्छा है कि अंतिम स्वांस राधा रानी की इसी जन्मभूमि में लूं। उनका कहना था कि बहुत साल से बरसाना में साधना कर रहे हैं। श्रीजी की कृपा से उनका लंदन प्रवास और सांसारिकता से मोह छूट गया। तबसे ब्रज में साधना कर रहा हूं। उनके गुरु भाई राजेंद्र दास शास्त्री 80 साल के हैं और लंदन में रहते हैं। उनकी भी इच्छा है रावल में ही उनकी जीवन लीला पूरी हो। मां के संकेत के अनुसार चार साल बाद शास्त्री लंदन से रावल आकर यहां भागवत की दो कथा और भण्डारा कराएंगे। बाबा कहते हैं कि उनके गुरुभाई दामोदर दास एवं उनकी बहन गंगा माता भी लंदन में रहते हैं और उन दोनों की इच्छा है कि रावल में ही नश्वर देह का त्याग हो।
फूल डोल 15 कोः सेवायत मुखिया कल्ला के अनुसार 15 मार्च को रावल में फूल डोल का आयोजन होगा।--भोलेश्वर उपमन्यु

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