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बिहार में नितीश कुमार की छटवीं पारी

 अशोक कुमार शर्मा |  2017-07-27 17:27:09.0  0  Comments

बिहार में नितीश कुमार की छटवीं पारी

बिहार में सत्ता के समीकरणों में आमूलचूल परिवर्तन को एक 'दुर्भाग्यशाली राजनीतिक दुर्घटना' एवं देश के लोकतंत्र के लिए एक वार्निंग सिग्नल के रूप में देखा जाना चाहिए ! लेकिन बिहार के लालू-नितीश गठबंधन के इस चक्रव्यूह को मोदी-अमित शाह की जोड़ी ने सेंध लगाकर नहीं तोड़ा है -- जैसा कि उनके मुखर नुक़्ताचीन मानते हैं ! इसके लिए बिहार का शकुनि लालू यादव स्वयं जिम्मेदार है जिसकी असंख्य घोटालों में घुटी भांग उसको परमानन्दित करने कि जगह बदहजमी कर गयी है ! मोदी-अमित ने सिर्फ उस ज्वाला को प्रज्जवलित किया है जो लालू-नितीश के अनहोली अलायन्स के अन्तर में सुलग और पल रही थी -- और उचित शब्दों में कहें तो यह अलायन्स बिना पहियों के रोलिंग स्केट्स पर घिसट-घिसट कर एक अनिश्चित मंजिल की तरफ चल रहा था ! मोदी-अमित की जोड़ी ने केवल सुप्तावस्था में पड़े या राख में दबे उन शोलों को हवा देने का काम किया है ! लालू और नितीश राजनीतिक चेकरबोर्ड के दो दूरस्थ असमानार्थी ध्रुव हैं जो नदी के दो पाटों की तरह मिल ही नहीं सकते थे ! कहाँ भ्रष्टाचार के दलदल में आकण्ठ डूबा लालू और कहाँ वो काफी हद तक सदाचारी माना जाने वाला और राजनीतिक शुचिता को तवज्जो देने वाला नितीश कुमार ! यह सत्ता को प्राप्त करने के लिए एक सुविधा की शादी या marriage of convenience थी जिसका देर-सबेर टूटना तय था ! इस पूरे घटनाक्रम में मोदी-अमित को घर बैठे-बिठाए बिना किसी गंभीर प्रयास के मुंह मांगी मुराद मिल गयी है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे और उनके तथाकथित मिशन 2019 के लिए उत्प्रेरक का काम करेंगे और देश की प्रतिनिधि संस्थाओं में बीजेपी के प्रचण्ड बहुमत का मार्ग प्रशस्त करेंगे ! इसी प्रकार नितीश की चार वर्षों के बाद की घर वापसी विपक्षी एकता और महागठबन्धन के लिए ताबूत में आखिरी कील साबित होगी ! विपक्ष का इस प्रकार हिन्दुस्तान के राजनीतिक परिदृश्य से धीमा-धीमा विलुप्तिकरण देश और देश के लोकतन्त्र के लिए शुभ संकेत नहीं है ! मोदीजी चाहे लाख कई अच्छी पहलों के सूत्रधार रहे हों, लेकिन यह भी समझा और माना जाना चाहिए कि उनके कई निर्णयों में परिपक्वता की भारी कमी और मनमानापन परिलक्षित होता है ! एक प्रभावशाली विपक्ष के अभाव में यह मनमानापन और अधिक बढ़ना तय है ! एक करप्ट सोसाइटी को आप रातों-रात राइट ट्रैक या सन्मार्ग पर नहीं ला सकते ! उनके कई निर्णय हिन्दुस्तान के बहुसंख्य समाज -- विशेष रूप से निचले तबके के लोगों -- को बर्बादी और भुखमरी की कगार पर ले जाकर छोड़ेंगे, और कइयों को ले जा भी चुके हैं ! ना तो यह देश अमरीका और इंग्लैंड बन पायेगा और ना ही यह भारत रह पायेगा ! ऐसे में एक मजबूत, सार्थक, कारगर और ऊर्जावान विपक्ष वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है -- जो लालू और ममता जैसा बेसुरा और राहुल जैसा नौसिखिया तो नहीं हो सकता ! इस मनमानी से निबटने के लिए किसी अटल बिहारी वाजपेयी, प्रणव मुख़र्जी या राम मनोहर लोहिया सरीखे धारदार विपक्षी नेताओं या बाल ठाकरे जैसे धाकड़ रेडिकल एक्टिविस्ट की जरूरत है ! लालू जैसे भारतमाता के चीरहरण के अपराधी दण्डित होने की प्रक्रिया में है और होने भी चाहिए लेकिन यह भी जरूरी है कि मुर्गी के चोर को फांसी की सजा भी नहीं होनी चाहिए !
-- पुष्कर राज कपूर

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अशोक कुमार शर्मा ( 500 )

अशोक कुमार शर्मा एक लब्ध-प्रतिष्ठित लेखक एवं पत्रकार हैं ! अनेकों बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित, वे देश के कई जाने-माने संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे हैं ! सरकारी स्तर पर वे उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में संयुक्त निदेशक तथा उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री के ओएसडी रह चुके हैं !


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