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संस्कृतियों, भाषाओं का गढ़ रहा है भारत : प्रणव

संस्कृतियों, भाषाओं का गढ़ रहा है भारत : प्रणव

गुवाहाटी : राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भारतीय समाज की विविधता और उसकी सहिष्णुतावादी प्रकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा देश पुरातन काल से ही विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों का गढ़ रहा है। श्री मुखर्जी ने यहां 'नमामि ब्रह्मपुत्र' कार्यक्रम का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने कहा, " यदि कोई मुझे कहता है कि हम भारतीय लोग तार्किक हैं तो मैं यह स्वीकार करूंगा, लेकिन यदि कोई मुझसे कहे कि भारतीय असहिष्णु होते हैं ,तो इसमें मेरी असहमति होगी। " उन्होंने कहा, "असम के महान विद्वान और समाज सुधारक शंकरदेव की शिक्षाओं समेत हमारी परंपरा हमें कभी असहिष्णु कार्यों की अनुमति नहीं देगी। " श्री मुखर्जी ने कहा कि देश की 130 करोड़ जनसंख्या में सभी सात बड़े धर्मों का पालन करने वाले लोग रहते हैं। इसके अलावा देश में 200 भाषाएं बोलने वाले लोग रहते हैं तथा भारत विश्व में एकमात्र ऐसा देश है जहां एक झंडा और एक संविधान है। उन्होंने कहा, "लोगों में आपसी विश्वास और सामंजस्य हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।" राष्ट्रपति ने वैश्विक मंच पर ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़ी संस्कृति और सभ्यता का प्रचार करने के लिए असम सरकार के प्रयासों की प्रशंसा भी की। इस अवसर पर भूटान के प्रधानमंत्री तेशरिंग टोबगे, असम के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित, मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के अलावा अन्य गणमान्य अतिथि भी मौजूद थे। --वार्ता

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