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तुर्की से म्यांमार तक रेललिंक बनेगा, पूरे एशिया को जोड़ेगी रेल

 Agencies |  2017-03-15 06:59:13.0  0  Comments

तुर्की से म्यांमार तक रेललिंक बनेगा, पूरे एशिया को जोड़ेगी रेल

नयी दिल्ली: भारत ने दक्षिण एशिया, पूर्वी एवं पश्चिम एशिया के बीच रेल कनेक्टिविटी को तेजी से आगे बढ़ाने के लिये काम शुरू कर दिया है और इस्तांबुल से इस्लामाबाद कॉरीडोर को लाहौर-लुधियाना-कोलकाता-ढाका के रास्ते यांगून तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज यहां एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनएस्केप) द्वारा दक्षिण एवं दक्षिण पश्चिम एशिया में मज़बूत रेल परिवहन कनेक्टिविटी विषय पर आयोजित एक दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन के मौके पर यह प्रस्ताव किया। कार्यशाला में भारत के अलावा आठ देश -अफगानिस्तान, बंगलादेश, भूटान, कज़ाखस्तान, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान और रूस के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। श्री प्रभु ने कहा कि विश्व की आर्थिक प्रगति का केन्द्र एशिया होने वाला है। इसके लिये क्षेत्रीय आर्थिक विकास की संभावनाअों का दोहन किये जाने की जरूरत है जिसके लिये कारोबार एवं बाजार का एकीकरण और परिवहन कनेक्टिविटी बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समुद्री परिवहन के लिंक भले ही मौजूद हों पर जलवायु परिवर्तन की चुनौती तथा समय एवं लागत को ध्यान में रखते हुए रेल लिंक का कोई विकल्प नहीं है। दक्षिण एशिया, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण पूर्वी एशिया का क्षेत्र विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र है। यहां ही गरीबी का आंकड़ा विश्व में सबसे ज़्यादा है। रेल लिंक के माध्यम से ना केवल कारोबार बल्कि गरीबी उन्मूलन में भी सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। रेल मंत्री ने बताया कि भारत ने नेपाल की राजधानी काठमांडू से दिल्ली और काठमांडू से कोलकाता के बीच रेल कनेक्टिविटी पर काम शुरू कर दिया है। भूटान में भी दो जगहों से कनेक्टिविटी परियोजना पर काम किया जा रहा है। बंगलादेश के साथ भारतीय रेलवे बहुत सक्रियता से काम कर रही है। इम्फाल से जिरीबाम होकर तामू और माण्डले तक रेल लिंक बनाने की योजना है। अफगानिस्तान सरकार ने भी भारत से देश में रेल लिंक बनाने में मदद करने का अनुरोध किया है। श्री प्रभु ने कहा कि तुर्की के इस्तांबुल से ईरान के तेहरान होकर पाकिस्तान में इस्लामाबाद तक कंटेनर ट्रेन का प्रायोगिक परिचालन किया गया है। इसे लाहौर से लुधियाना-कोलकाता होकर ढाका और आगे म्यांमार तक जोड़ने के लिये काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बंगलादेश का चटगांव बंदरगाह भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिये अहम बिन्दु है। बाद में संवाददाताओं से बातचीत में श्री प्रभु ने कहा कि इस रेल कनेक्टिविटी से न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को लाभ होगा। कार्यशाला में बंगलादेश के प्रतिनिधि जहीरुल इस्लाम ने कहा कि बंगलादेश में ढाका से काक्स बाज़ार के रास्ते दोहाज़ारी-गुंडुम तक 129 किलोमीटर तक लंबी रेल लाइन बिछायी जा रही है जो 2019 तक पूरी हो जायेगी। इससे बंगलादेश एवं म्यांमार के बीच सीधा रेललिंक खुल जायेगा। इसी प्रकार अगरतला और अखौरा के बीच लाइन भी 2018 तक पूरी हो जायेगी। --वार्ता

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