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क्या सोनिया गांधी कांग्रेस में चल रही कुर्सी की रार खत्म कर पायेगी

क्या सोनिया गांधी कांग्रेस में चल रही कुर्सी की रार खत्म कर पायेगी

- मुख्यमंत्री गहलोत, सचिन पायलट के मनभेद-मतभेद छिपे नहीं है

जयपुर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने देश की करीब 130 साल पुरानी कांग्रेस का जनाधार 2014 में नैस्तनाबूद करने की जो घोषणा की थी उसे 2019 में 52 सांसदों की संख्या पर समेटकर अमलीजामा पहना दिया। कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष राहुल गांधी ने इतनी बुरी हार से सदमें में आकर कांग्रेस से इस्तीफा यह कहकर दे दिया कि घर के विभीषणों के आगे मेरी नहीं चली।

भाजपा के परिवारवाद के आरोप को झेल रही कांगे्रस को आखिरकर दूसरी बार श्रीमती सोनिया गांधी को पार्टी का कार्यभार सौपना पड़ा अब श्रीमती सोनिया गांधी हताश कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए तैयार है पहली बड़ी रैली राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष, डिप्टी सीएम सचिन पायलट राजस्थान में कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जन्मोत्सव 19 अगस्त के उपलक्ष्य में 20 अगस्त को राज्य में एक बड़ी रैली करवाना चाहते है रैली का मकसद साफ है कि जो हताश कार्यकर्ता और बड़े दिग्गज कांग्रेसी नेता पार्टी छोड रहे है वे अपना फैसला बदल लें। सनद् रहे कि राज्य में भी सभी 25 लोकसभा सीटें हारने का दोष मुख्यमंत्री गहलोत-उपमुख्यमंत्री पायलट के सिर है पर मुख्यमंत्री गहलोत ने थोड़ा बहुत दोष अपने सिर से राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राज्यसभा भेजने का रास्ता साफ कर हटा लिया है लेकिन तथाकथित राजस्थान की मुख्यमंत्री की कुर्सी की चल रही जंग को श्रीमती सोनिया गांधी हल कर पायेगी या नहीं यह तो वक्त बतायेेगा पर 20 अगस्त की रैली में तस्वीर साफ हो जायेगी पूरे देश के ओल्ड, युवा कांग्रेसियों में चल रही पॉवर हासिल करने की जंग का अंत राजस्थान से हो पायेगा अथवा नहीं। हालांकि अशोक गहलोत ने अपनी चाणक्कीय राजनीति से निर्दलीय और बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस का समर्थन लेकर यह दिखा दिया कि भाजपा कांग्रेस सरकार को गिराने की चाहे गिनती बयानबाजी कर ले सरकार गिरने वाली नहीं है शायद यही कारण है कि 20 अगस्त वाली रैली गहलोत-पायलट सोनिया गांधी के नेतृत्व में ऐसी कराना चाहते है जिससे पूरे देश के कांग्रेसियों में पार्टी के प्रति हौसला बुलंद हो सके और आने वाले महीनो में महाराष्ट्र, झारखड, हरियाणा विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस को मुद्दो के आधार पर भाजपा से अधिक जनसमर्थन मिल सके।


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