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दिल्ली में दूसरी बार शून्य पर आने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने खड़े किए सवाल

दिल्ली में दूसरी बार शून्य पर आने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने खड़े किए सवाल

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी दिल्ली सहित देशभर के कई राज्यों में सत्ता में लंबे समय तक काबिज रही है। लेकिन अब कांग्रेस की हालत यह हो गई है कि वह दिल्ली में लगातार दो बार से शून्य सीटों पर बरकरार है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी कभी पार्टी की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं,तो कभी एक-दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं।इसी कड़ी में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी को रणनीति बदलने की सलाह दी है। वहीं, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली चुनाव में कांग्रेस के प्रभारी रहे पीसी चाको पर निशाना साधा है।

दिल्ली में लगातार दूसरी बार खाता खालने में नाकामयाब रही कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह सामने आ रही है। पार्टी की दिल्ली इकाई के बाद अब केंद्रीय नेतृत्व भी निशाने पर आ गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि कांग्रेस को नई सोच और नई रणनीति पर काम करने की आवश्यकता है। वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी पीसी चाको को आड़े हाथ लिया है। दरअसल पीसी चाको इस हार के लिए पूर्व सीएम और दिवंगत हो चुकीं शीला दीक्षित को जिम्मेदार बताया था। पीसी चाको ने इस्तीफा देते हुए कहा, कांग्रेस पार्टी का डाउनफॉल 2013 में शुरू हो गया था, जब शीला दीक्षित जी मुख्यमंत्री थीं। नई पार्टी आप ने पूरे कांग्रेस वोट बैंक को छीन लिया तब से हम इसे कभी वापस नहीं पा सके। यह अभी भी आम आदमी पार्टी के साथ बना हुआ है।'

एक तरफ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता आप की जीत में खुश दिखे। वहीं, दूसरी ओर शर्मिष्ठा मुखर्जी जैसी नेत्रियों ने इस 'खुशी' पर सवाल खड़े कर रही है। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम के ट्वीट पर उनसे सवाल भी पूछा। आम आदमी पार्टी को जीत की चिदंबरम के बधाई देने वाले ट्वीट को अपने ऑफिशल हैंडल से री-ट्वीट करते हुए शर्मिष्ठा ने कहा, 'सर, उचित सम्मान के साथ बस इतना जानना चाहती हूं कि क्या कांग्रेस पार्टी राज्यों में बीजेपी को हराने के लिए क्षेत्रीय दलों को आउटसोर्स कर रही है? यदि नहीं, तो फिर हम अपनी हार पर मंथन करने के बजाय आप की जीत पर गर्व क्यों कर रहे हैं? और अगर ऐसा है, तो हमें (प्रदेश कांग्रेस कमिटी) संभवत:अपनी दुकान बंद कर देनी चाहिए।'

आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में आईं अल्का लांबा भी चुनाव नतीजों के बाद से ही 'नई टीम' बनाकर मेहनत करने की बात कर रही हैं। बता दें कि अल्का लांबा चांदनी चौक सीट से लड़ीं और बुरी तरह हारीं। उन्हें पांच हजार से भी कम वोट मिले। गौरतलब है कि दिल्ली के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर कभी नहीं दिखी। पार्टी में कई धड़े अलग-अलग चले, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा। इसके अलावा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी दिल्ली चुनाव में खास रुचि नहीं दिखाई।



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