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आतंकवाद के कारण होने वाले मानवाधिकारों के उल्लंघन से बढ़कर दूसरा कोई मामला नहीं: शाह

आतंकवाद के कारण होने वाले मानवाधिकारों के उल्लंघन से बढ़कर दूसरा कोई मामला नहीं: शाह

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आतंकवाद और नक्सलवाद के कारण होने वाले मानवाधिकारों के उल्लंघन से बढ़कर दूसरा कोई मामला नहीं हो सकता। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 26वें स्थापना दिवस पर शाह ने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद के चलते 40 हजार लोगों की जान चली गई।

उन्होंने कहा, 'नक्सलवाद के कारण कई जिले विकास से वंचित रहे गए और कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। क्या उनके मानवाधिकार नहीं हैं? सबसे ज्यादा मानवाधिकारों का उल्लंघन उन लोगों का हुआ जिन्हें नक्सलवाद और आतंकवाद का दंश झेलना पड़ा।'

शाह ने कहा, 'हिरासत में मौतों और बिना न्यायिक या कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति की किसी सरकारी संगठन या व्यक्ति द्वारा की गई हत्याएं (एक्स्ट्रा ज्यूडिशल कीलिंग्स) रोकना हमारा दायित्व है, लेकिन हर व्यक्ति की जिंदगी में सम्मान एवं शांति सुनिश्चित करवाना भी हमारी ही जिम्मेदारी है।'

शाह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के पिछले 25 वर्षों के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा, 'इस क्षेत्र में जागरूकता फैलाने को लेकर एनएचआरसी और एजीओज के प्रयास अद्भुत हैं। यह सरकार इसे आगे बढ़ाने के प्रति बेहद गंभीर है।'

शाह ने एनएचआरसी और मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों से मानवाधिकारों के प्रति सोच बदलने का आग्रह किया जिसमें देश की विविधताओं और चुनौतियों का समाधान हो सके। उन्होंने कहा, 'हमारी संस्कृति हमें 'वसुधैव कुटुंबकम' की शिक्षा देती है। विश्व को अपने परिवार की तरह देखने की अवधारणा अपने आप में मानवाधिकार की सबसे बड़ी अवधारणा है।'

शाह ने मानवाधिकारों पर वाद-विवाद में गरीबी को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, 'अगर हम भारत में मानवाधिकारों की बात करते हैं तो सरकार समेत सभी पक्षों की तरफ से गरीबी के खात्मे की दिशा में और ज्यादा प्रयास किए गए तो परिणाम में नाटकीय परिवर्तन आ सकता है।'


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