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भारत में कहां-कहां होती है रावण की पूजा?

भारत में कहां-कहां होती है रावण की पूजा?
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डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन 'मनुज', इन्दौर

रावण भारत के इतिहास एवं आस्था का महत्वपूर्ण पात्र है। किंचित् मान्यतानुसार रावण में अनेक गुण भी थे। सारस्वत ब्राह्मण पुलस्त्य ऋषि, का पौत्र और विश्रवा का पुत्र रावण एक परम भगवान शिव भक्त, उद्भट राजनीतिज्ञ, महाप्रतापी, महापराक्रमी योद्धा, अत्यन्त बलशाली, शास्त्रों का प्रखर ज्ञाता, प्रकाण्ड विद्वान्, पंडित एवं महाज्ञानी था। रावण के शासन काल में लंका का वैभव अपने चरम पर था और उसने अपना महल पूरी तरह स्वर्ण जड़ित बनाया था, इसलिये उसकी लंकानगरी को सोने की लंका अथवा सोने की नगरी भी कहा जाता है। रावण ने श्रीराम की पत्नी सीता का हरण किया। इस कारण राम ने उसका बध किया था। बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में विजयादशमी पर्व मनाया जाता है। उस दिन रावण का पुतला बनाकर जलाया जाता है। किन्तु भारत में कई ऐसे स्थान हैं जहां रावण के गुणों का स्मरण करते हुए उसकी पूजा की जाती है।

1. दिल्ली- एनसीआर के अन्तर्गत ग्रेटर नोयडा के बिसरख गाँव वाले अपने गाँव को रावण की जन्म स्थली मानते हैं। इस गांव में रावण का एक ऐसा मंदिर भी है, जिसमें 42 फिट ऊँचे शिवलिंग और 5.5 फिट ऊंचे रावण का स्टेच्यू है। यहां रावण को महाब्रह्म का स्थान प्राप्त है और दशहरे पर 'महाब्रह्म' के लिए शोक मनाने की परंपरा है। बिसरख गांव में रामलीला या रावण दहन नहीं किया जाता । यहां के लोग दशहरा नहीं मनाते, जिस दिन राम द्वारा रावण को मार दिा गया था। यहाँ दशहरे को रावण का दहन नही पूजन करते है।

2. उदयपुर- राजस्थान के उदयपुर के झाडोर तहसील में स्थित भगवान कमलनाथ महादेव मंदिर है। रावण शिवजी का अनन्य भक्त था। कहते हैं यहां कमलनाथ महादेव की स्थापना स्वयं रावण ने की थी। यहाँ शिव जी की पूजा से पहले रावण की पूजा की जाती है। इसके बाद ही शिव की पूजा की जाती है।

3. जोधपुर- जोधपुर के रहनेवाले मुद्गल ब्राह्मणों को रावण का वंशज माना जाता है और इन्होंने अपने राजा के लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण भी कराया है। मंदिर का आधार रावण की मूर्तियों से सुसज्जित है और ऊपर रावण का भव्य मंदिर बना है। जोधपुर शहर को मंदोदरी यानी रावण की पत्नी का मूल स्थान माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंदोदरी मंडोर की रहनेवाली थीं, जो जोधपुर राज्य की प्राचीन राजधानी थी। 'छवरी' नाम की एक छतरी अभी भी वहां पर है। (मंदसौर के भदखेड़ी ग्रामवासियों की भी यह मान्यता है कि मंदोदरी वहां की जन्मी थी) रावण मंदिर शहर के चांदपोल क्षेत्र में महादेव अमरनाथ और नवग्रह मंदिर परिसर में बनाया जा रहा है, जहां रावण के आराध्य देवताओं, शिव और देवी खुराना की मूर्तियां स्थापित हैं।

4. बैद्यनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश- हिमाचल प्रदेश में जिला मुख्यालय शहर कांगड़ा से लगभग 60 किलोमीटर दूर बैजनाथ शहर स्थित है। यहां के निवासियों का मानना है कि दशहरा का पर्व न मनाकर वे भगवान शिव के प्रति रावण की भक्ति का सम्मान कर रहे हैं। जबकि देशभर में दशहरा के पर्व पौराणिक राक्षस राजा रावण के पुतले को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जलाया जाता है। बैद्यनाथ हिमालय की सुंदर धौलाधार पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित एक छोटा शहर है। यह भगवान शिव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जिसे 13 वीं शताब्दी में बनाया गया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ब्रह्मांड के निर्माता भगवान ब्रह्मा के पौत्र और ऋषि विश्रवा के पुत्र तथा धन के देवता कुबेर का छोटा भाई था। यहां के लोगों का यह भी मानना है कि रावण एक विद्वान, कला के पारखी और शिव के अनन्य अनुयायी थे। उन्हें एक विद्वान के रूप में माना जाता है और उनकी पूजा करने वाले लोगों का मानना है कि वे उस विद्वान राजा को जलाना उचित नहीं समझते जो सभी वेदों का ज्ञाता होने के साथ स्वयं महादेव का अनन्य भक्त हो।

5. काकीनाड़ा आंध्रप्रदेश- काकीनाड़ा देश के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है, जहां रावण का मंदिर है। यह क्षेत्र समुद्र तट के बहुत करीब स्थित है और शहर के बीचों-बीच स्थित है रावण का भव्य मंदिर। मंदिर के गेट पर रावण की विशाल प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इस प्रतिमा में उनके दस सिर मौजूद हैं। यह स्थान उन अद्वितीय जगहों में से एक है, जहां काकीनाड़ा या आंध्र प्रदेश की यात्रा के दौरान जरूर घूमने आना चाहिए। मंदिर के अंदर भगवान शिव की मूर्तियां और शिवलिंग की स्थापना की गई हैं। मंदिर से दिखनेवाला वॉटर व्यू और इस मंदिर की शांति मन को बहुत लुभाती है।

6. कानपुर- कानपुर के दशानन मंदिर में हजारों लोग रावण की पूजा करते हैं। रावण का मंदिर शहर के शिवाला क्षेत्र में बने शिव मंदिर से सटा हुआ है। यह रावण मंदिर साल में केवल एक बार दशहरे के त्यौहार पर खुलता है, जब रावण को उच्च शिक्षित व्यक्ति मानने वाले लोग उसके ज्ञान के कारण उसके मंदिर में दर्शन और पूजन करते हैंस्वयं भगवान श्रीराम रावण के ज्ञान का सम्मान करते थे। कहा जाता है कि रावण को सभी हिंदू धर्मग्रंथों का ज्ञान थाश्रद्धालु इस मंदिर में जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस मंदिर की आधारशिला 1868 में रखी गई थी।

7. इलाहाबाद में दशहरा उत्सव पर भारद्वाज आश्रम में रावण की पूजा करके भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। जिसे रावण की बारात कहते हैं। स्थानीय निवासी पुष्प वर्षा करते हैं।

8. मध्यप्रदेश में रावण प्रतिमाएं- मध्यप्रदेश में चार स्थानों पर रावण की प्रतिमाओं की पूजा होती है। रावणग्राम में 600 वर्ष प्राचीन लेटी हुई रावण की प्रतिमा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस मूर्ति को खड़ा करना बड़ा अपशकुन हो सकता है। मान्यता है कि जब भी किसी ने ऐसा करने का प्रयास किया है, क्षेत्र में अप्रिय घटनाएं घटित होने लगती हैं। उज्जैन के निकट चिकली ग्राम में रावण की मूर्ति की पूजा होती है। बैतूल मध्यप्रदेश में हर साल दशहरा पर मेला लगता है। बैतूल में घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के छतरपुर गांव में रावण देव का टेकरी पर प्राचीन मंदिर है। जहां का आदिवासी समाज रावण की पूजा करता है। यह समाज रावण दहन का विरोध करता है। मध्यप्रदेश में रावण की पूजा पर 'जहां होती है रावण की दामाद के रूप में पूजा' आलेख अलग से है।

—दैनिक हाक फीचर्स


Updated : 2020-10-21T06:10:49+05:30
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