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बहुत बढ़ गयी है सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की संख्या

बहुत बढ़ गयी है सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की संख्या

बृजेन्द्र राय*

आज के इस कंप्यूटर के दौर में सोशल मीडिया का उपयोग खूब किया जा रहा और दिलचस्प बात यह है कि हम 21वीं सदी के उस दौर में जी रहे हैं जहाँ व्यक्ति की लोकप्रियता को सोशल मीडिया में उसकी उपस्थिति से नापा जा रहा है। आज कल लगभग हर व्यक्ति सोशल मीडिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना चाहता है, चाहे वो किसी निजी संस्था से जुड़ा हो या सरकारी संस्था से, चाहे वो राजनैतिक व्यक्ति हो या सामाजिक व्यक्ति, चाहे वो कोई सरकारी जनसेवक हो या जनता की वोट से बना समाजसेवी, चाहे कोई छोटा कलाकार हो या बड़ा कलाकार, चाहे कोई गरीब हो या अमीर और लगभग हर व्यक्ति जो एंड्राइड फ़ोन या कंप्यूटर चलाना जानता है वो अपने विचारों या संस्थान के विचारों को सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे तक पहुँचना चाहता है।

1996 में जब बोल्ट नामक पहली सोशल मीडिया वेबसाइट बाजार में आयी तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि 21वीं सदी के मात्र 20 वर्षों में विश्व कि लगभग आधी आबादी सोशल मीडिया की उपयोगकर्ता होगी। अप्रैल 2020 तक विश्व कि जनसंख्या के कुल 49.03 प्रतिशत लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। आकड़ों के अनुसार 2020 में विश्व में कुल 3.81 बिलियन लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं जो कि 2015 के आँकड़े (2.07 बिलियन) के लगभग दोगुने के बराबर हैं। सबसे अधिक सोशल मीडिया का उपयोग एशिया में किया जाता है। विश्व में सामान्यतः सोशल मीडिया का उपयोग करने वाला व्यक्ति दिन भर में औसतन 2 घंटे 24 मिनट सोशल मीडिया पर व्यतीत करता है। एक रिपोर्ट कि मानें तो अगर कोई व्यक्ति 16 साल कि उम्र में सोशल मीडिया चलाना शुरू करता है और 70 सालों तक उपयोग करता है तो वो अपनी जिंदगी के 5.7 साल सोशल मीडिया पर व्यतीत करेगा। सोशल मीडिया में सबसे अधिक फेसबुक का उपयोग किया जाता है जिसकी संख्या 2.6 बिलियन है, 2 बिलियन लोग यूट्यूब का भी उपयोग करते हैं, व्हाट्सप्प का 1.6 बिलियन लोग तथा 1.3 बिलियन लोग फेसबुक मैसेंजर का उपयोग करते हैं।

अमेरिका की जनसंख्या के कुल 70 प्रतिशत लोगों का सोशल मीडिया अकाउंट हैं जिसमें सबसे अधिक महिलाओं की संख्या है। विश्व के कुल सोशल मीडिया अकाउंट का 55 प्रतिशत अकाउंट पुरुषों का है बाकी अन्य वर्ग का। 2003 में लिंकडीन, 2004 में फेसबुक, 2006 में ट्विटर, 2009 में व्हाट्सप्प जैसे सोशल मीडिया नेटवर्क बाजार में आए, जिसने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया और इससे सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की संख्या में खूब इज़ाफा हुआ। वहीँ आज के इस बदले दौर में सोशल मीडिया का दुरुपयोग भी खूब हो रहा है। मीडिया का दुरुपयोग कर लोगों के दिलों दिमाग को जाति और धर्म आधारित बनाया जा रहा जिससे ना सिर्फ भेदभाव बढ़ रहा है अपितु जातीय तथा धर्म आधारित हिंसा को बढ़ावा भी मिल रहा है। सोशल मीडिया पर गलत एवं भ्रांमक ख़बरों का सत्यापन नहीं हो पाता जिससे लोगों तक गलत और भ्रांमक ख़बरें पहुँचती है जिससे ना सिर्फ लोगों में आक्रोश उत्पन्न होता है अपितु लोग हिंसा तक करने को उतारू हो जाते हैं। जरूरी हो चला है की प्रत्येक देश की सरकारें सोशल मीडिया का गलत उपयोग करने वालों के विरुद्ध कड़ा नियम बनाएँ जिससे गलत एवं भ्रांमक खबर परोसने वालों के विरुद्ध उचित कार्यवाही हो और अन्य लोग भी गलत एवं भ्रांमक ख़बरों का प्रचार करने से बचें।

सोशल मीडिया का एक दूसरा पहलू भी है जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ कर रखता है। यहाँ लोग एक दूसरे के विचारों को सुन, पढ़ सकते हैं तथा सभी को अपने विचारों का आदान प्रदान करने की आज़ादी रहती है। कभी - कभी सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत सारे असहायों की सहायता भी की गयी है जिसका जीता जागता उदाहरण दिल्ली के मालवीय नगर का बाबा का ढाबा है या फिर अभिनेता सोनू सूद द्वारा कोरोना काल में हुई तालाबंदी से लेकर अब तक किए जा रहे कार्य। इन सबके बावजूद आज की युवा पीढ़ी को यह समझना जरूरी है कि हम सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ा तो रहे हैं फिर भी देश में लोग भुखमरी, गरीबी, अत्याचार और विकास की बाट जोह रहे हैं इसलिए अब जरूरी है युवाओं को सोशल मीडिया कि दुनिया से निकल कर आगे आएं व कुछ नया और अलग करें जिससे ना सिर्फ देश का विकास हो बल्कि देश से भुखमरी, गरीबी, अत्याचार जैसी बीमारियाँ दूर हों सकें।

—दैनिक हाक फीचर्स

*यांत्रिकी अभियंता / स्वतंत्र विचारक

Updated : 13 Oct 2020 7:17 PM GMT
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