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दूध पीने से शरीर और मसल्स कमजोर होने से बच सकते हैं

दूध पीने से शरीर और मसल्स कमजोर होने से बच सकते हैं

-अमेरिका में हुए शोध में किया गया दावा

लंदन: वॉशिंगटन में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति रोज दूध पीता है तो उसे क्रॉनिक डिजीज (लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों) से खुद का बचाव करने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, प्रेग्नेंसी के दौरान दूध पीने का बच्चे के जन्म के समय हेल्दी वेट, बोन मिनरल और लंबाई पर सकारात्मक असर होता है। इसी तरह रोजाना दूध को आहार का हिस्सा बनाने पर बुजुर्गों को शारीरिक कमजोरी और मसल्स के कमजोर होने की स्थिति से बचाया जा सकता है। स्टडी के लिए दूध के सेहत और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों जैसे दिल की बीमारी, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, ब्लैडर कैंसर और टाइप 2 पर असर पर मौजूद ग्लोबल साइंटिफिक लिटरेचर को रिव्यू किया गया। इसके साथ ही इस स्टडी में दूध और मिल्क बेस्ड प्रॉडक्ट्स का ग्रोथ, बोन मिनरल डेंसिटी, मसल मास, प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग पर असर को भी जांचा गया।दूध और इससे बनने वाले प्रॉडक्ट्स में न सिर्फ कई तरह के पोषक तत्व होते हैं बल्कि यह शरीर में प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, जिंक, सेलेनियम, विटमिन ए, रिबोफ्लेविन, विटमिन बी12 और पैंटोथैनिक ऐसिड के लिए जरूरी न्यूट्रिशन भी उपलब्ध करवाता है। शोधकर्तओं ने पाया कि दूध के प्रॉडक्ट्स का सेवन वर्टिब्रल फ्रैक्चर के रिस्क को भी कम करता है। हालांकि, डेयरी प्रॉडक्ट्स के ज्यादा और कम सेवन के शरीर पर असर की इस स्टडी में दूध और लंबी आयु के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया। लो-फैट डेयरी प्रॉडक्ट्स को मेटाबॉलिटक सिंड्रोम के रिस्क को कम करने में भी असरदार पाया गया। यह उस विचार को सपॉर्ट करता है जिसमें कहा गया है कि दूध से जुड़े उत्पादों के सेवन से दिल की बीमारी का खतरा नहीं बढ़ता है, बल्कि यह सकारात्मक असर करता है। दूध को आहार में शामिल करने को आयुर्वेद से लेकर मॉर्डन मेडिकल से जुड़े डॉक्टर्स भी अहम मानते हैं। इससे हड्डियां तो मजबूत होती ही हैं, साथ ही मसल्स को हुए नुकसान को ठीक करने, रेड ब्लड सेल्स को हेल्दी बनाए रखने जैसे फायदे भी होते हैं।


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