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आधार के निराधार तर्क

 Agencies |  2017-03-14 18:21:07.0  0  Comments

आधार के निराधार तर्क

राजग सरकार बनने से पहले और बाद में आधार कार्ड के औचित्य को लेकर सवाल उठाये जाते रहे हैं। कालांतर सरकार को यह महत्वाकांक्षी योजना इतनी रास आई कि हर सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिये आधार कार्ड होना जरूरी बनाया जा रहा है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन से जुड़ी विसंगतियों के चलते बार-बार शीर्ष अदालत ने इसकी अनिवार्यता पर सवाल उठाये हैं। उसने सरकार से कहा भी है कि इसके न होने की दशा में किसी व्यक्ति को सरकारी लाभ से वंचित न किया जाये। मगर सरकार किंतु-परंतु के साथ इस योजना के अनुपालन में आमादा है। अब तक सरकार गैस कनेक्शन, पीडीएफ, मनरेगा जैसी कल्याणकारी योजनाओं के अलावा 36 कार्यक्रमों के लिये आधार कार्ड अनिवार्य कर चुकी है। अब सरकार पचास अन्य कार्यक्रमों को आधार से जोडऩे का मन बना चुकी है। मगर हालिया आदेश के चलते देशके करोड़ों बच्चों की खाद्य सुरक्षा और शिक्षा पर सवालिया निशान लग गया है। 28 फरवरी को आये आदेश के अनुसार उन्हीं बच्चों को मिड डे मील दिया जायेगा, जिनके पास आधार कार्ड होंगे।
यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि मिड डे मील योजना के चलते सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या व उपस्थिति में धनात्मक बदलाव हुआ है। इनमें अधिकांश बच्चे ऐसे कमजोर तबके से आते हैं, जिनके लिये आधार कार्ड बनाना और उपयोग करना, दोनों ही आसान काम नहीं है। एक अनुमान के अनुसार बीस करोड़ बच्चों के आधार कार्ड अभी नहीं बन पाये हैं। मगर अदालत के आदेशों के बावजूद सरकार अपने फैसले लागू करती रहती है। सरकार की दलील है कि आधार के क्रियान्वयन से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और सरकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा। मिड डे मील योजना से बच्चों को जोडऩे से संभव होगा कि जो लोग अब तक आधार कार्ड से जुडऩे से रह गये हैं, उन्हें भी जोड़ा जायेगा मगर गरीब तबके के सामने बॉयोमेट्रिक प्रमाणन की दिक्कत आती है। राजस्थान में राशन की दुकानों में आधार अनिवार्य करने के बाद लाखों परिवार इसलिये अनाज नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि उनकी बॉयोमेट्रिक पुष्टि नहीं हो पा रही है। इसमें दो राय नहीं कि आधार एक बहुआयामी योजना है मगर इसके क्रियान्वयन से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने, बॉयोमेट्रिक डाटा की सुरक्षा, निजता के मौलिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

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