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आम आदमी का बजट

 Agencies |  2017-03-14 18:17:23.0  0  Comments

आम आदमी का बजट

आम आदमी पार्टी का हमेशा दावा रहा है कि वह परंपरागत राजनीतिक दलों की सरकारों से इतर जनसरोकारों को प्राथमिकता देती है। दिल्ली सरकार के तीसरे बजट में आप ने इस कथनी को करनी में बदलने का प्रयास किया है। उसकी प्राथमिकता दैनिक जरूरतों की वस्तुओं पर कर कम करने तथा शिक्षा व स्वास्थ्य को महत्व देना रहा है। पहले तो सरकार ने इस बार के बजट में पिछले साल के बजट के मुकाबले सोलह फीसदी की वृद्धि की। उसका आकार 48 हजार करोड़ रखा है। उल्लेखनीय पहलू यह है कि शिक्षा व स्वास्थ्य के लिये 36 प्रतिशत बजट रखा गया है। ये देश के अन्य राज्यों के लिये भी प्रेरक पहल है कि आम लोगों से जुड़े विभागों को पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराये जाएं। बच्चों को गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध कराना हर सरकार का दायित्व है। इसी क्रम में दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों पर निर्भरता कम करने के मकसद से अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन सेंटर और प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने की घोषणा की है। इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता व परीक्षा फल में सुधार संभव है।
निश्चित रूप से दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा पेश बजट में कहीं न कहीं दिल्ली में होने वाले नगर निगम चुनावों की छाया भी नजर आती है। यही वजह है कि सरकार ने करों में बढ़ोतरी नहीं की तथा कई जरूरी चीजों के करों में कटौती भी की है। लेकिन इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि सरकार ने बजट में पारदर्शिता व जवाबदेही तय करने का प्रयास किया है। पहली बार किसी सरकार ने आउटकम बजट का वायदा किया है। यानी यह बताने का प्रयास होगा कि जनता से मिले करों का खर्च सही जगह हो। दरअसल देश में आम परंपरा रही है कि सरकारी योजनाओं के अनुरूप बजट का आवंटन तो हो जाता है मगर उस खर्च के बाद जनता को सुविधा वास्तव में मिली या नहीं, इसका मूल्यांकन नहीं हो पाता। विकास योजनाओं के बजट की बंदरबांट में अधिकारी, नेता ठेकेदार शामिल हो जाते हैं। केंद्र व राज्य स्तर पर जनता को बजट के सही इस्तेमाल की जानकारी होनी ही चाहिए। सही मायनो में इस अभिनव प्रयोग के अनुपालन के लिये सरकारों पर दबाव हर राज्य में बनाया जाना चाहिए। तभी सही मायनो में लोकतंत्र के लक्ष्य पूरे हो सकेंगे।

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