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ब्रिक्स में अपने 'मित्र देशों' की एंट्री चाहता है चीन

 Agencies |  2017-03-10 07:42:45.0  0  Comments

ब्रिक्स में अपने

नई दिल्ली , 09 मार्च (आरएनएस)। ब्रिक्स में अभी तक भारत, चीन, ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका शामिल है। लेकिन चीन अब इस समूह का विस्तार कर इसमें कुछ विकासशील देशों को शामिल करना चाहता है। चीन अब 'ब्रिक्स प्लस' बैनर के तले पाकिस्तान, श्रीलंका और मेक्सिको जैसे अन्य विकासशील देशों को भी इस संगठन का हिस्सा बनाने की बात कर रहा है। जानकारों की मानें तो यह चीन की भारत को ब्रिक्स में कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक, अमेरिका के होनोलुलु स्थित एशिया-पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्यॉरिटी स्टडीज में प्रोफेसर मोहन मलिक का कहना है कि चीन 'ब्रिक्स प्लस' के जरिए पाकिस्तान, श्रीलंका और मेक्सिको जैसे अपने करीब देशों को ब्रिक्स के विस्तार के लिए आमंत्रित कर सकता है। इससे वह ब्रिक्स में हावी होने की कोशिश करना चाह रहा है। इसलिए शायद ही भारत, चीन के 'ब्रिक्स प्लस' का समर्थन करे। चीन का कहना है कि इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ाने तथा इस समूह को विकासशील देशों के लिए सबसे प्रभावशाली मंच बनाने के मकसद से इसको विस्तार देने का प्रयास किया जाएगा। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन सितम्बर महीने में चीन के शियामेन शहर में होगा। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि राष्टीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक और विदेश मंत्रिायों की पहली आधिकारिक बैठक की शुरुआत को लेकर बातचीत करते हुए राजनरीतिक एवं सुरक्षा सहयोग का प्रयास किया जाएगा। वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में वांग ने कहा, 'हम मित्रों के समूह को व्यापक विस्तृत बनाएंगे और ब्रिक्स को विकासशील देशों के सहयोग का सबसे प्रभावशाली मंच बनाएंगे। कुछ सदस्य देशों को पेश आ रही चुनौतियों का हवाला देते हुए वांग ने कहा कि उभरते हुए बाजारों की व्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखे हैं और हर सदस्य के सामने अपनी तरह की चुनौतियां हैं। मोहन मलिक ने कहा, 'चीन के इस प्लान से ब्रिक्स में शामिल अन्य देशों के मुकाबले भारत की संभावनाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। विस्तार के बाद यह संगठन अपना फोकस खो सकता है और विकास जैसे मुद्दों की बजाय यह चीन के पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म तक ही सीमित रह सकता है।Ó यदि चीन ब्रिक्स के विस्तार की योजना पर काम करते हुए अपने सहयोगी देशों को इस संगठन में शामिल करता है तो भारत की संभावनाओं पर विपरीत असर होगा। इसलिए भारत, चीन के इस प्रस्ताव का विरोध कर सकता है।

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