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देश में नौ प्रमुख कंपनियों के महज 18 प्रतिशत खाद्य उत्पाद खरे

 Agencies |  2017-03-19 07:39:08.0  0  Comments

देश में नौ प्रमुख कंपनियों के महज 18 प्रतिशत खाद्य उत्पाद खरे

नयी दिल्ली : पोषक तत्वों के लिहाज से देश में नौ प्रमुख कंपनियों के महज 12 प्रतिशत पेय और 18 प्रतिशत खाद्य उत्पाद ही खरे साबित हुए हैं और बाकी सभी उत्पादों में इनका स्तर तय मानकों से काफी नीचे पाया गया है। ये एक सर्वेक्षण बात में सामने आयी है। सामाजिक सराेकारों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था 'बिल एंड मिलिंडा गेट्स फांउडेशन' की वित्तीय मदद से एक डच कंपनी 'एक्सेस टू न्यूट्रीशन फाउंडेशन' की ओर से कराए गए ताजा सर्वेक्षण में देश में खाद्य उत्पाद बनाने और बेचने वाली शीर्ष नौ कंपनियों के उत्पादों की 'भारतीय खाद्य सुरक्षा एंव मानक प्राधिकरण' द्वारा तय मानकों के आधार पर तैयार एक इंडेक्स पर जांच की गई। इनमे सबसे चौंकाने वाली बात यह पाई गई कि इन कंपनियों के महज 12 प्रतिशत पेय उत्पाद और 18 प्रतिशत खाद्य उत्पादों में ही भरपूर पोषक तत्व पाए गए बाकी सभी उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। पोषक तत्वों के लिहाज से मदर डेयरी के उत्पाद पहले स्थान पर रहे जबकि अमूल दूसरे स्थान पर, हिन्दुस्तान यूनीलीवर और ब्रिटानिया के उत्पाद क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर,पार्ले पांचवें ,कोका कोला छठे ,नेस्ले सातवें ,पेप्सीको आठवें और मोंडेलेज इंडिया नौवें स्थान पर रहे। सर्वेक्षण के ये नतीजे देश मे पांच साल से कम आयु वर्ग के बच्चों की एक बड़ी आबादी में कुपोषण तथा एक बड़े वर्ग में मोटापे के बढ़ रही समस्या से निबटने की बड़ी चुनौती के संदर्भ में काफी अहमियत रखते हैं। ये नतीजे खाद्य पदार्थ बनाने वाली इन कंपनियों द्वारा विज्ञापनों में किए जाने वाले उन दावों को भी झुठलाते हैं कि उनके उत्पाद पोषक तत्वों से भरपूर हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार पोषक आहार नहीं मिल पाने के कारण देश में पांच साल से कम आयु वर्ग के करीब 38.4 प्रतिशत बच्चों का पूरा शारीरिक विकास नहीं हो पाता। दूसरी तरफ भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् की 2015 की रिपोर्ट में देश में मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या 13 करोड़ पचास लाख बतायी गई है।-वार्ता

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