Top
Home > शिक्षा और कला > कोरोना के चलते दुनिया के 1 अरब बच्‍चे हुए शिक्षा से दूर : रिपोर्ट

कोरोना के चलते दुनिया के 1 अरब बच्‍चे हुए शिक्षा से दूर : रिपोर्ट

कोरोना के चलते दुनिया के 1 अरब बच्‍चे हुए शिक्षा से दूर : रिपोर्ट

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बीच स्कूलों के बंद होने के चलते बच्चों की शिक्षा को भारी नुकसान हुआ है। दुनिया के करीब 1 अरब बच्‍चों की शिक्षा तक पहुंच संभव नहीं हो पा रही है। घर पर इंटरनेट की सुविधा ना होने के चलते 40 करोड़ से अधिक बच्‍चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं, करीब 34.70 करोड़ बच्‍चों को स्‍कूलों के बंद होने से पौष्टिक खाना नहीं मिल पा रहा है। परिवारों के पास खाना नहीं होने से सबसे कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में अगले छह महीने में 5 साल से कम उम्र के 10.20 लाख से अधिक बच्‍चों के कुपोषण से काल के गाल में समा जाने का अनुमान है। बच्चों की बुरी स्थिति पर ये खुलासा ''फेयर शेयर फॉर चिल्‍ड्रेन- प्रिवेंटिंग द लॉस ऑफ ए जेनरेशन टू कोविड-19'' नाम की एक रिपोर्ट से हुआ है जिसे लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्‍ड्रेन समिट में पेश किया गया। समिट का आयोजन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। रिपोर्ट में कोरोना महामारी में बच्चों की स्थिति पर और कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं जिससे पता चलता है कि बाल अधिकारों को काफी अधिक नुकसान पहुंचा है। इसके मुताबिक बच्चों की टीकाकरण योजनाओं के बाधित होने से एक वर्ष या उससे कम उम्र के 8 करोड़ बच्‍चों में बीमारी का खतरा बढ़ गया है। गरीब परिवार की आय बंद होने से उनके बच्‍चों का स्‍कूल जाना बंद हुआ है, जिससे वे बाल श्रम, गुलामी, दुर्व्‍यापार और बाल विवाह करने को मजबूर हुए हैं। जहां लॉकडाउन में कमी आई है, वहां बाल श्रमिकों को फिर से काम पर वापस लाया जा रहा है। भारत में भी यह खतरा मंडरा रहा है। लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्‍ड्रेन के संस्‍थापक और 2014 के नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी ने कहा- "पिछले दो दशकों में हम पहली बार बाल श्रम, गुलामी, गरीबी और स्‍कूलों से बाहर होने वाले बच्‍चों की बढ़ती संख्‍या को देख रहे हैं। यह कोविड-19 के दुष्‍प्रभावों को दूर करने के लिए जो वायदे किए गए थे, उस वायदे को दुनिया की अमीर सरकारों द्वारा पूरा नहीं करने के उनके असमान आर्थिक रुख के प्रत्‍यक्ष परिणाम हैं। मैं इस अकल्‍पनीय स्थिति को होने देने के लिए तैयार नहीं हूं। दुनिया की सबसे अमीर सरकारें अपने आप को संकट से बाहर निकालने के लिए खरबों का भुगतान कर रही हैं। वहीं समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर पड़े बच्‍चों को अपने रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है।



Updated : 10 Sep 2020 10:59 PM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top