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मीर बाकी द्वारा बनवाई गई बाबरी मस्जिद किसी बड़े विशाल मंदिर के मलबे पर तामीर की गई थी

 अशोक कुमार शर्मा |  2017-03-25 06:24:02.0  0  Comments

मीर बाकी द्वारा बनवाई गई बाबरी मस्जिद किसी बड़े विशाल मंदिर के मलबे पर तामीर की गई थी

अयोध्या में तामीर की गयी बाबरी मस्जिद किसी प्राचीन हिन्दू मंदिर के मलबे से ही बनाई गई थी और यह बात केंद्र सरकार श्रीमती इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्वकाल में ही जानती थी I भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान के निदेशक श्री के के मुहम्मद की मलयाली भाषा में लिखित आत्मकथा Njan Enna Bharatiyan (मैं एक भारतीय) में साफ तौर पर आरोप लगाया है I

उन्होंने किताब में लिखा है कि अयोध्या में विवादित ढाँचे के आसपास हुई खुदाई में मिले विभिन्न प्रमाणों और प्राचीन हिन्दू प्रतीकों से यह साफ पता चलता है कि मीर बाकी द्वारा बनवाई गई बाबरी मस्जिद किसी बड़े विशाल मंदिर के मलबे पर तामीर की गई थी। मस्जिद में इस्तेमाल उस मंदिर के एक नहीं सभी 14 खम्भो की नक्काशी में 11 वीं हिन्दू वास्तुकला और वैदिककाल के हिन्दू प्रतीकों से ऐसा लगता था कि तोड़ा गया मंदिर किसी अत्यंत प्राचीन काल से सम्बन्ध रखता था I
उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "इंदिराजी के समय हुई पुरातत्व विभाग की खुदाई की जानकारी सरकार को भी थी मगर किसी ने इस मामले को सुलझाना नहीं चाहा और इस बेबुनियाद मसले को हिन्दू मुसलमानों की प्रतिष्ठा का मुद्दा बना दिया गया I इस मामले में वामपंथी इतिहासकारों द्वारा इलाहबाद उच्च न्यायालय को भी गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश की गयी I

डॉ मुहम्मद ने कहा है कि सियासी महत्वाकांक्षाओं के मारे कुछ प्रो इरफ़ान हबीब और प्रो रोमिला थापर जैसे इतिहासकार ये नहीं मानना चाहते कि वे सिर्फ और सिर्फ इतिहासकार हैंI जबकि हम पुरातत्व वैज्ञानिकों से बेहतर इतिहास का गवाह कोई हो नहीं हो सकता I संसार के किसी भी मुल्क के पुरातत्वशास्त्रियों से भी अगर अयोध्या के विवादित स्थान की फिर से जांच कराई जाए तो नतीजा ये कि वहां की मस्जिद किसी ऐतिहासिक मंदिर तो गिरा कर बनाई गयी थी I इन इतिहासकारों ने न्यायालय कोशिश की और जब फैसला आ गया तो लोगों को उसके खिलाफ भड़काया I

डॉ मुहम्मद पुरातत्व विभाग से 2012 में रिटायर होने के बाद से हैदराबाद के आगा खान ट्रस्ट के निदेशक के रूप में सक्रिय हो गए I उन्होंने एक और साक्षात्कार में उन्होंने कहा,"मेरी किताब से हिन्दू अपना हक़ लेने के लिए हरगिज़ नहीं भड़केंगे I हिन्दू कट्टर होते तो भड़कते उन्होंने मुसलमानों पर भी यकीन किया और क़ानून पर भीI वे अगर धर्मांध होते तो मंदिरों को तोड़ कर बनवाये गई तमाम मस्जिदों को वापस मांगतेI कौन चाहेगा कि पिछले लोगों के पाप का खामियाज़ा आनेवाली नस्लें भुगतें?"
डॉ केके मोहम्मद पांच वक्त के नमाज़ी और रोज़दारी के पाबन्द ईमानदार मुसलमान के तौर पर विख्यात रहे हैं I उनकी किताब के चित्र यहाँ दे रहा हूँI

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अशोक कुमार शर्मा ( 528 )

अशोक कुमार शर्मा एक लब्ध-प्रतिष्ठित लेखक एवं पत्रकार हैं ! अनेकों बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित, वे देश के कई जाने-माने संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे हैं ! सरकारी स्तर पर वे उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में संयुक्त निदेशक तथा उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री के ओएसडी रह चुके हैं !


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