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नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, एनजीओ ने दिया फर्जी ऑफर लैटर

नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, एनजीओ ने दिया फर्जी ऑफर लैटर

अलीगढ़: नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से ठगी हो रही है। इसका खुलासा तब हुआ जब दो लोग खैरबाइपास स्थित एक एनजीओ का पत्र लेकर कार्यालय पहुंचे। वहां पता लगा कि एनजीओ फर्जी है और एनजीओ ने नौकरी का झांसा देकर युवाओं से पैसा ले लिये हैं। पैसा देकर नौकरी का पत्र प्राप्त करने वाले पीड़ितों ने इसकी शिकायत थाना बन्नादेवी पुलिस से की है। जांच हुई तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। उक्त एनजीओं में नौकरी के नाम पर लाखों रूपये की ठगी बेरोजगार युवकों से की जा रही है। कार्यालय के संचालक ने बताया कि कार्यालय के मण्ड़ल अध्यक्ष थाना गौंड़ा के रहने वाले एक विष्व हिन्दू परिषद के नेता जी है। ठगी के शिकार युवक की शिकायत पर पुलिस खैर बाईपास पर पहुंची और नेता बताने वाले के साथ अन्य लोगों को पकड़कर थाना बन्नादेवी ले आई, जहां पुलिस को चकमा देकर कथित विष्व हिन्दू परिषद का नेता बाइक पर लिफ्ट लेकर भाग गया। जबकि पुलिस ठगी के मामले में समझौता कराना बता रही है,अब सवाल उठता है कि अगर इसी तरह के मामले थानों में समझौता कर निपटा दिये जाएगें तो फिर अदालतों का क्या होगाद्यक्या पुलिस की जजमेंट करने में लगी हुई है।

थाना बन्नादेवी के खैर बाईपास स्थित ऑन शोध संस्थान के कार्यालय के स्टाफ से पूछताछ की तो उन्हें कुछ शक हुआ। दोनों को जिला क्षय रोग अधिकारी के पास भेजा गया। युवक-युवती के अपना परिचय पत्र एवं लखनऊ के एनजीओ का ऑफर लैटर दिखाया। जानकारी की तो पता चला कि उनसे नौकरी के नाम पर एक-एक लाख रुपये लिए गए। तब यह लैटर जारी हुआ है। जब एनजीओ के मुख्यालय संपर्क साधा तो पता चला कि इस नाम का कोई एनजीओ नहीं है। वहां से मोबाइल पर बताया कि इस नाम का कोई एनजीओ नहीं है। इसकी जानकारी कराई जाएगी।

कोरोना महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के चलते बहुत से लोगों की नौकरी चली गई है। ऐसे में यह लोग तेजी से नौकरी खोजने का काम कर रहे हैं। लेकिन यहां पर सावधानी की जरूरत है। ऐसे परेशान लोगों को ठगने के लिए बाजार में पूरा तंत्र खड़ा हो गया है। यह कई तरह से इन बेरोजगारों को ठगने की कोशिश कर रहा है, और कई बार सफल भी जाता है। इसलिए जरूरी है कि ऑनलाइन नौकरी की तलाश से पहले यह जान लें कि यहां पर नौकरी मिलने की प्रक्रिया क्या और कैसे गलत ऑफर करने वालों को पकड़ें। हालांकि जालसाज काफी चालाकी से अपना जाल बुनते हैं, लेकिन अगर आप थोड़ा सतर्क रहें तो इनके झांसे से बचना काफी आसान है। एक बार लुटने के बाद ऐसे जालसाजों से पैसों की भरपाई काफी कठिन होती है।

क्या करते हैं ठगी करने वाले

सबसे पहले जानें ठगी करने वालें करते क्या हैं ऐसे जालसाज ऑनलाइन जॉब पोर्टल से शिकार खोजने का काम करते हैं। आमतौर पर इनका तरीका इस प्रकार होता है -जॉब रिक्रूटमेंट साइट से नौकरी तलाशने वाले की प्रोफाइल निकाल लेते हैं -जो शिकार बन सकते हैं, उन सभी को बल्क में मेल भेजा जाता है -फ्रॉड करने वाले खुद को जॉब कंसल्टेंट के तौर पर पेश करते हैं -ये लोग अपनी फर्जी वेबसाइट, अस्थायी दफ्तर दिखाते हैं -लोगों से वॉलेट या बैंक ट्रांसफर के जरिये रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के लिए कहते हैं -ऑनलाइन या टेलीफोन से इंटरव्यू कर लेते हैं -बाद में फर्जी अप्वाइंटमेंट लेटर जारी कर देते हैं। इस तरह के लोग होते हैं ठगों के निशाने पर -टियर 2 या टियर 3 शहरों के युवा -कम लोकप्रिय कॉलेज या संस्थानों के ग्रेजुएट -खराब कम्युनिकेशन स्किल वाले युवा -5 साल तक के कार्य अनुभव वाले -20 से लेकर 25 साल की उम्र वाले -अंग्रेजी लिखने और बोलने में कमजोर लोग -कम कुशल जानिए ठगी के लिए कैसे-कैसे तरीके करते हैं इस्तेमाल यह जालसाल आमतौर पर लोगों को शिकार बनाने के लिए इस तरह से फंसाते हैं ई-मेल है फंसाने का सबसे आसान तरीका नौकरी देने का रैकेट चलाने वालों के लिए यह सबसे आसान तरीका है। यह लोग खुद को फ्रीलांस जॉब कंसल्टेंट के रूप में पेश कर ये नौकरी देने वाली बेवसाइटों से लोगों की प्रोफाइल तक पहुंच हासिल कर लेते हैं। इसके बाद यह लोग बल्क में मेल भेज देते हैं। अगर ये 5 फीसदी लोगों को भी अपना शिकार बनाने में सफल होते हैं, तो ठीकठाक पैसा बना लेते हैं।

Updated : 18 Sep 2020 3:59 PM GMT
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