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माता के नवरात्रों का शुभारम्भ आज से

माता के नवरात्रों का शुभारम्भ आज से

बहादराबाद (दैनिक हाक): कल (आज)से माता के नवरात्रों का शुभारम्भ होने जा रहा है। इस बार नवरात्रों का पर्व एक माह देर से शुरू हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार हर साल माता के नौरात्रों का पर्व श्राध्द की अमावस्या के ठीक अगले दिन से शुरू होता है, परन्तु इस बार एक माह का अधिमास होने से नवरात्रें में एक माह का अन्तर आ गया है। हिन्दू माह में दिनों और तिथियों की घटत बढत के कारण हर साल मासिक दिनों मे अन्तर आ जाता है जबकि अंग्रेजी कैलेण्डर प्रति वर्ष 365 दिन का होता है । यह अधिमास पुरूषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। दिनों के घटने की प्रक्रिया के कारण 164 साल बाद एक माह का अधिमास बन जाने से प्रति वर्ष श्राध्द की पित्रविसर्जनि अमावस्या के अगले दिन प्रारम्भ होने वाले माता के नौरात्रें एक माह बाद शुरू हो रह हैं। नैरात्रों पर प्रति वर्श क्षेत्र में माता के मन्दिरों ंमें विशेष पूजा अर्चना तो होती ही है वहीं माता के भक्त अपने घरांे में कलश स्थापना के बाद नौ दिन वृत रख कर माता का गुणगान करते हेंै। उनकी पूजा अर्चना करते हैं। माता की नवरात्रों में पूजा विशेष फलदाई कही गई है। हालांकि एक साल में माता के चार नवरात्रें शास्त्रों में बताये गये हैं, जिनमंे से शरदकालीन, चैत्र नवरात्रे और दो गुप्त नवरात्रों का वर्णन भी मिलता है। अधिकाशं भक्तगण शरदकालीन नवरात्रों और चैत्र नवरात्रों में ही अपने घरों में कलश स्थापना और सांझी (मिट्टी की मूर्ति) की स्थापना करने तथा नौरते (नौरते)बोने के बाद माता की विशेष पूजा अर्चना करते हैं। वृत रखते हैं और शप्तशती का पाठ पढतें हैं।

दुर्गाशप्तशति में लिखा है कि जो भक्त माता के नवरात्रों में दुर्गा शप्तशति का पूरा पूरा पाठ पढते हेंै उन पर माता अति प्रसन्न होती है और उन्हे साल भर तक लगातार पूजा पाठ करने, बलि पूजा करने, प्रसाद चढाने, रात्रि जागरण करने से जो लाभ प्राप्त होता है वही लाभ केवल नवरात्रों में उनके चरित्र का वर्णन सुनने से प्राप्त हो जाता है। यही कारण है कि भक्तजन इन नौ दिनों में माता के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्र घंटा, स्कन्धमाता, कात्यायनी, कालरात्रि,महागौरि तथा सिध्दिदात्री की पूजा करते हैं। सभी देवियां अपने स्वरूप के कारण भिन्न भिन्न नामों से जानी जाती हैं। इनका पूजन करने से भक्त को असीम सुख सम्पत्ति का लाभ मिलता है। वहीं आज के दिन नौरते (जौं) बोने के पीछे एक वैभानिक कारण माना जाता है जिन दिनों नोरात्रे होते हैं उन्हीं दिनों किसान गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार करते हैं। गेहूं के लिए महीन मिट्टी का होना बडा लाभदायक होता है। किसान गेहूं के खेत में मिट्टी की भुरभुरता को नापने के लिए तैयार खेत में मिट्टी का घडा डाल कर देखते हैं कि घडा फूटा तो नहीं यदि घडा फूट जाये तो तो खेत की मिट्टी अभी गेहूं के लिए पूरी तरह तैयार नहीं मानी जाती है। उसी मिट्टी को घरों में लाकर नौरतें बोये जाते हैं और देखा जाता है कि गेहूं की फसल कैसी होगी? यह आदि काल से चला आ रहा है। सभी नोरात्रों में अगली फसल के लिए खेत तैयार किये जाते हैं और घरों में मिट्टी लाकर नौरते बोये जाते हैं।


Updated : 16 Oct 2020 11:05 PM GMT
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