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हरिद्वार में महीनेभर के लिए गंगनहर बंद

हरिद्वार में महीनेभर के लिए गंगनहर बंद

व्यापारियों में आक्रोश, लंबे समय से टाईमिंग को लेकर है विवाद

कुमार दुष्यंत

हरिद्वार (दैनिक हाक): बीती मध्यरात्रि से गंगनहर को बंद कर दिया गया है। अब महीनेभर बाद 15 नवंबर को गंगा में जल छोड़ा जाएगा। इस दौरान गंगनहर समतलीकरण, कुंभ एवं राजमार्ग के कार्य सम्पन्न होंगे। गंगा बंदी होते ही हरिद्वार के दुकानदार एकबार फिर मायूस हो गये हैं।

हरिद्वार में गंगाबंदी के समय को लेकर हमेशा से विवाद रहा है। इसबार क्योंकि लंबे लॉकडाउन के बाद बाजारों में अब रौनक लौटनी शुरु हुई थी। इसके तुरंत बाद एक माह के लिए गंगा बंद कर दिये जाने से कारोबारी खासे नाराज हैं।गंगाबंदी के विरोध में प्रदर्शन करने पर आपदा एक्ट की धाराओं में तीन व्यापारी नेताओं पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है। हरिद्वार के दुकानदारों का आरोप है कि हरिद्वार में गंगाबंदी से पर्यटक एवं यात्री ऋषिकेश, मंसूरी, नैनीताल कूच कर जाते हैं, जिससे हरिद्वार का कारोबार ठप्प हो जाता है।व्यापारियों की मांग है कि दीपावली के बाद गंगा बंद की जानी चाहिए। हरकीपैड़ी की प्रबंधकारिणी गंगासभा भी इसका समर्थन करती है। लेकिन गंगनहर पर यूपी का नियंत्रण होने के चलते सालों से यह विवाद कायम है।

हरिद्वार से कानपुर तक निकाली गई गंगनहर उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ,अलीगढ़, हाथरस, मथुरा,फतहपुर आदि क्षेत्रों को सिंचित करती चलती है। मुरादनगर से दिल्ली को भी इससे पेयजल आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा पथरी में चित्तौड़ा, मुजफ्फरनगर में निरगाजनी, मेरठ में सलावा जलविद्युत परियोजनाएं भी गंगनहर से संचालित होती हैं। अलीगढ़ के हरदुआगंज व दादरी का पावर प्रोजेक्ट भी गंगनहर पर ही आधारित है। उत्तरप्रदेश सिंचाई विभाग का कहना है कि इस समय प्रदेश को सिंचाई के लिए गंगनहर के जल की बहुत कम आवश्यकता होती है। इसलिए गंगाबंदी के इस समय को बदला नहीं जा सकता।






Updated : 16 Oct 2020 12:33 PM GMT
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