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हरकी पैड़ी पर शाही स्नान की परंपरा को बदला नहीं जाएगाः श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह

हरकी पैड़ी पर शाही स्नान की परंपरा को बदला नहीं जाएगाः श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह

हरिद्वारः श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा है कि हरकी पैड़ी पर कंुंभ स्नान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक परंपराओं को बदला नहीं जा सकता है। हरिद्वार में 2021 में होने वाले महाकुंभ के दौरान भी सभी तेरह अखाड़े हरकी पैड़ी पर ही शाही स्नान करेंगे। कुंभ में अखाड़ांें के शाही स्नान को लेकर उठे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्कुण्ड पौराणिक स्थान है। जिसका वर्णन शास्त्रों में भी मिलता है। हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुण्ड पर गंगा स्नान करने से करोड़ों गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सदियों से अखाड़ों का कुंभ स्नान हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुण्ड पर होता रहा है। पुरातन परंपराओं को बदला नहीं जा सकता है। ना ही कोई नई परंपरा शुरू नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में 2021 के महाकुंभ में अखाड़ों के शाही स्नान का स्थान बदले जाने पर कोई चर्चा नहीं हुई। इसके अलावा मुख्यमंत्री व मेला प्रशासन के साथ शनिवार को सीसीआर में हुई अखाड़ा परिषद की बेठक में भी इस संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी व महामंत्री हरिगिरी द्वारा भी इस संबंध में कोई चर्चा या प्रस्ताव नहीं रखा गया। ऐसे में शाही स्नान को लेकर विवाद उत्पन्न करना ठीक नहीं है।

कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने बताया कि गंगा भारत की पहचान व संस्कृति है। राजा भगीरथ स्वर्ग से गंगा को पृथ्वी पर लाए। पृथ्वी पर आने के बाद राजा भगीरथ के रथ के पीछे पीछे ही गंगा चली। समुद्र मंथन के दौरान हरकी पैड़ी पर अमृत कलश से अमृत छलकने के कारण वहां ब्रह्मकुण्ड का निर्माण हुआ। पवित्र ब्रह्मकुण्ड में सदियों से सभी अखाड़े कंुंभ का शाही स्नान करते आए हैं। यह परंपरा आगे भी इसी प्रकार जारी रहेगी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज व महामंत्री हरिगिरी के नेतृत्व में हरिद्वार कुंभ दिव्य व भव्य रूप से संपन्न होगा। हरिद्वार महाकुंभ की दिव्य छटा पूरे विश्व को आलोकित करेगी।


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