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शाही स्नान नीलधारा पर होने को लेकर किया जा रहा भ्रामक प्रचारः श्रीमहंत नरेंद्र गिरी

शाही स्नान नीलधारा पर होने को लेकर किया जा रहा भ्रामक प्रचारः श्रीमहंत नरेंद्र गिरी

हरिद्वारः अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि हरिद्वार महाकुंभ में अखाड़ों के शाही स्नान नीलधारा पर होने को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद की और से कभी नहीं कहा गया कि कुंभ मेले के दौरान अखाड़ों के शाही स्नान हरकी पैड़ी के अलावा कहीं और संपन्न होंगे। निरंजनी अखाड़े में पत्रकारों से वार्ता करते हुए श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि नीला धारा में अखाड़ों के शाही स्नान करने को लेकर किया जा रहा भ्रामक प्रचार दुखद है। प्राचीन काल से ही कुंभ मेलों में अखाड़ों के हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुण्ड पर शाही स्नान करने की परंपरा रही है। शाही स्नान की परंपरा को बदले जाने का अखाड़ा परिषद की और से कभी कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया। आदि अनादि काल से ब्रह्मकुण्ड में महाकुंभ स्नान होते चले आ रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों द्वारा तथ्यहीन तरीके से तोड़ मरोड़कर नीलधारा पर स्नान करने की बात कही गयी है। जो कि पूरी तरह से निराधार है।

गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने शाही स्नान एवं कुंभ मेले की व्यवस्थओं पर चर्चा करते हुए कहा कि शास्त्रों में वर्णित उल्लेख के अनुसार पौराणिक समय से ब्रह्मकुण्ड हरकी पैड़ी पर ही कुंभ मेले के शाही स्नान होते चले आ रहे हैं। लाखों करोड़ों श्रद्धालु भक्तों की भावनाएं हरकी पैड़ी ब्रह्मकुण्ड से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि शाही स्नान को लेकर की गयी टीका टिप्पणी अखाड़ा परिषद की और से नहीं की गयी है और ना ही प्रदेश के किसी भी आला अधिकारी ने इस तरह की कोई बात की। उन्होंने कहा कि बैठक में सभी तेरह अखाड़ों के संत महंत शामिल हुए। लेकिन कुछ लोगों द्वारा निराधार तरीके से महाकुंभ के दौरान होने वाले शाही स्नानों पर टीका टिप्पणी की गयी है। जो कि पूरी तरह से निराधार है। पौराणिक काल से ही ब्रह्मकुण्ड हरकी पैड़ी पर ही अखाड़ों के शाही स्नान निर्विघ्न रूप से संपन्न होते चले आ रहे हैं। पौराणिक मान्यताओं को बनाए रखने में सभी की सहभागिता होनी चाहिए। शास्त्रों में वर्णित उल्लेखों से किसी भी प्रकार छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। मेला अधिकारी दीपक रावत व मेला एसएसपी जनमेजय खण्डूरी ने कहा कि संत हमारे पूज्यनीय हैं। शाही स्नान को लेकर जो परंपरा चली आ रही है। उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। शाही स्नान के स्थान में परिवर्तन की बात किसी ने नहीं की है।


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