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सरकार बैंकों को अधिक नगदी देगी ताकि दे सकें अधिक ऋण

सरकार बैंकों को अधिक नगदी देगी ताकि दे सकें अधिक ऋण

नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था की सुस्ती को दूर करने में प्रयासरत केंद्र सरकार चाहती है कि लोन सस्ता हो साथ ही बैंक भी लोगों को अधिक से अधिक ऋण दें सके। यही कारण है कि सरकार अब सरकारी बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ यानी कर्ज देने की रफ्तार की समीक्षा हर तिमाही में करने के मूड में हैं। कर्ज देने की रफ्तार के आधार पर बैंकों की रेटिंग तय की जा सकती है। फिर उस रेटिंग के आधार पर बैंकों को कैश मुहैया कराया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार इस बारे में वित्त मंत्रालय ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति बन गई है। 14 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करने जा रही हैं। उस मीटिंग में इस बारे में विस्तार से चर्चा होगी और बात को आगे बढ़ाया जाएगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सरकार पहले तो इस त्योहारी सीजन में चाहती है कि बैंक ज्यादा लोन दें ताकि बाजार में मनी फ्लो बढ़े। खरीदारी में तेजी आए, ताकि कुछ सेक्टरों में मंदी की बात कही जा रही है उसे दूर किया जा सके। इसके अलावा सरकार यह भी चाहती है कि क्रेडिट ग्रोथ में तेजी सिर्फ त्योहारी सीजन तक सीमित न रहे, यह लगातार आगे बढ़ती रहे। सरकार चाहती है कि बैंक, होम और ऑटो लोन देने में तेजी बरतें। मौजूदा समय में इन दोनों सेक्टरों में मंदी का साया बढ़ा हुआ है। ऑटो सेक्टर में तो सितंबर माह में भी बिक्री कारोबार में गिरावट देखी गई है। दूसरी तरफ रियल्टी सेक्टर में लोन सस्ता होने के इंतजार में लोग खरीददारी नहीं कर रहे हैं। अब जबकि आरबीआई ने रेपो रेट कम कर दिया हैं, बैंक भी लोन सस्ता कर रहे हैं। ऑटो सेक्टर के एक्सपर्ट रणोज्य मुखर्जी का मानना है कि ऑटो कंपनियों ने अपनी गाड़ियों के दाम घटाए हैं। अगर बैंक लोन देने की रफ्तार बढ़ाएं तो निश्चित तौर पर ऑटो सेक्टर में खरीददारी बढ़ सकती है। रियल्टी सेक्टर के एक्सपर्ट डी.के. ढाका का कहना है कि लोग किफायती घर खरीदना चाहते हैं। वे लोन सस्ता होने का इंतजार कर रहे थे। अब ऐसा लग रहा है कि उनका इंतजार खत्म हुआ।


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