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भारत सरकार को झटका, वोडाफोन ने रेट्रो टैक्स केस जीता

भारत सरकार को झटका, वोडाफोन ने रेट्रो टैक्स केस जीता

नई दिल्ली: निजी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वोडाफोन ने भारत सरकार के खिलाफ 20,000 करोड़ रुपए का पूर्व प्रभावी (रेट्रोस्पेक्टिव) टैक्स का केस जीत लिया है।

सरकार और वोडाफोन के बीच 20,000 करोड़ रुपए के रेट्रो टैक्स को लेकर कोई सहमति नहीं बन पा रही थी। इसके बाद वोडाफोन 2016 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में मामला उठाया। द हेग कोर्ट ने शुक्रवार को भारत सरकार के खिलाफ सुनाए गए फैसले में कहा कि भारतीय टैक्स डिपार्टमेंट ने निष्पक्ष और बराबरी से काम नहीं किया है। जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने पर आयकर विभाग ने 12 फरवरी, 2016 को वोडाफोन को 22,100 करोड़ रुपए का टैक्स नोटिस भेजा। साथ ही टैक्स नहीं चुकाने पर संपत्तियां जब्त करने की धमकी भी दी गई थी।

2012 में कानून बनाकर 2007 से लगाया टैक्स

2007 में वोडाफोन ने हांगकांग के हचिसन ग्रुप के मालिक हचिसन हामपोआ के मोबाइल बिजनेस हचिसन-एस्सार में 67 फीसदी हिस्सेदारी 11 अरब डॉलर में खरीदी थी। वोडाफोन ने यह हिस्सेसदारी नीदरलैंड्स और केमैन आईलैंड स्थित अपनी कंपनियों के जरिए ली थी। इस डील पर आयकर विभाग वोडाफोन से कैपिटल गेन टैक्स मांग रहा था। वोडाफोन इस पर भी राजी था। इसके बाद सरकार ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स की मांग कर दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में खारिज कर दिया। सरकार ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स लागू करने के लिए फाइनेंस एक्ट 2012 बनाकर 2007 से लागू कर दिया, जिसे गलत साबित किया गया।

Updated : 25 Sep 2020 11:34 PM GMT
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